November 1, 2026

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जौहर यूनिवर्सिटी मनी लॉन्ड्रिंग मामला: रामपुर जेल से रिहाई के तुरंत बाद आजम खां गिरफ्तार, कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

गाजियाबाद।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खां की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर जेल से रिहाई मिलने के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया। रविवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आजम खां को गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
रिहाई के फौरन बाद ईडी की कार्रवाई
मिली जानकारी के अनुसार, आजम खां को शनिवार को रामपुर जेल से रिहा किया गया था। लेकिन जेल परिसर से बाहर आते ही ईडी की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यह पूरी कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोपों के तहत की गई है। ईडी का आरोप है कि ट्रस्ट और विश्वविद्यालय के संचालन व निर्माण में बड़े पैमाने पर अवैध वित्तीय लेनदेन किया गया है।
अदालत में पेशी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रविवार को जब ईडी की टीम आजम खां को लेकर गाजियाबाद की विशेष अदालत पहुंची, तो सुरक्षा के बेहद कड़े बंदोबस्त देखे गए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट परिसर और उसके आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पूरे परिसर में सतर्कता बरती जा रही थी और आने-जाने वालों पर पैनी नजर रखी जा रही थी।
पूछताछ के लिए रिमांड की मांग, कोर्ट ने भेजा जेल
विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेशी के दौरान ईडी के वकीलों ने आजम खां से वित्तीय लेनदेन और ट्रस्ट के दस्तावेजों को लेकर गहन पूछताछ के लिए कस्टडी रिमांड की मांग की। ईडी का तर्क था कि मामले की तह तक जाने के लिए उनसे आमने-सामने पूछताछ जरूरी है। हालांकि, कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आजम खां को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया।
कोर्ट परिसर में उमड़ी समर्थकों की भीड़
सपा के कद्दावर नेता आजम खां की गाजियाबाद कोर्ट में पेशी की भनक लगते ही सुबह से ही स्थानीय नेताओं, समर्थकों और आम लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। समर्थक उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब दिखे, जिसे देखते हुए पुलिस प्रशासन को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। ईडी की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है।