October 30, 2026

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शरद पूर्णिमा मेले में खस्ता-चाट खाने से 17 लोग फूड पॉइजनिंग के शिकार, दुकानदार पर केस

• तबीयत बिगड़ने पर सभी मरीज तिलोई मेडिकल कॉलेज में भर्ती, हालत सामान्य

• प्रशासनिक मुस्तैदी: सीएमओ की मौजूदगी में लगा कैंप, 102 ग्रामीणों की हुई जांच

• बिना अनुमति 60 साल से लग रहा था मेला; तेल सप्लायर की तलाश में जुटा खाद्य विभाग

अमेठी।

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित एक मेले में दूषित खाद्य पदार्थ (खस्ता-चाट) खाने से बच्चों समेत 17 लोग फूड पॉइजनिंग (खाद्य विषाक्तता) का शिकार हो गए। उल्टी-दस्त की गंभीर शिकायत के बाद सभी पीड़ितों को तत्काल तिलोई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है। राहत की बात यह है कि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की स्थिति फिलहाल सामान्य और नियंत्रण में बताई जा रही है।

मेले में चाट खाते ही बिगड़ी तबीयत

मामला मोहनगंज थाना क्षेत्र के पूरे कुटिया मजरे कोटवा गांव का है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में स्थित एक धार्मिक स्थल पर शरद पूर्णिमा मेले का आयोजन किया गया था। मेले में लगी एक दुकान से खस्ता-चाट खाने के कुछ ही देर बाद लोगों को उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी। एक के बाद एक कई लोगों, विशेषकर बच्चों की तबीयत बिगड़ने से पूरे गांव में हड़कंप मच गया। ग्राम प्रधान ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी।

बीमार होने वालों में बच्चे और महिलाएं शामिल

फूड पॉइजनिंग का शिकार होने वालों में मम्मनगंज मजरे कोटवा निवासी अमरजीत (15), अंकुर (10), अंशुमन (6), शिवांश (14), नैंसी (15), राधिका (14), वंदना (15) और दिव्यांश (3) शामिल हैं। इसके अलावा कोटवा निवासी अरविंद (12), हस्मतुल निशा (18), जितेंद्र (17), अनुज (18), तथा पूरे दान निवासी मनीषा (18), विमला (40), सलोनी (18), गुड़िया (50) और आदर्श (20) को भी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

सीएमओ की अगुवाई में लगा शिविर, 102 लोगों की जांच

घटना की सूचना मिलते ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अंशुमान सिंह के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम एक्शन में आई। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गांव के प्राथमिक विद्यालय में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर (कैंप) लगाया। शिविर में गांव के 102 लोगों के स्वास्थ्य की बारीकी से जांच की गई और जरूरतमंदों को दवाएं बांटी गईं। डॉक्टरों ने ग्रामीणों को खानपान में विशेष सावधानी बरतने और ओआरएस का घोल लेने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग की एक टीम लगातार गांव में स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

बिना प्रशासनिक अनुमति के लग रहा था मेला

स्थानीय प्रशासन की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। एसडीएम डॉ. अरुणिमा श्रीवास्तव ने बताया कि इस धार्मिक स्थल पर आयोजित होने वाले मेले के लिए आयोजकों द्वारा प्रशासन से कोई लिखित अनुमति (परमिशन) नहीं ली गई थी। वहीं, धार्मिक स्थल के कर्ताधर्ता रामप्रसाद का कहना है कि उनके पिता के समय से, पिछले करीब 60 वर्षों से इस परंपरा के तहत मेले का आयोजन होता आ रहा है।

चाट दुकानदार के खिलाफ विधिक कार्रवाई, तेल सप्लायर रडार पर

घटना के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) एसके चौहान ने बताया कि मेटरवा निवासी राजकुमार और उनका बेटा मोहित मेले में चाट की दुकान लगा रहे थे। प्रथम दृष्टया दूषित सामग्री बेचने के आरोप में दुकानदार राजकुमार के खिलाफ जिलाधिकारी (डीएम) न्यायालय में वैधानिक वाद (मुकदमा) दायर कर दिया गया है। इसके साथ ही, चाट बनाने में इस्तेमाल होने वाले घटिया या मिलावटी तेल की आशंका को देखते हुए, दुकानदार को तेल की आपूर्ति करने वाले थोक कारोबारी की पहचान और तलाश तेज कर दी गई है।

डॉक्टर की सलाह: बार-बार गर्म किया तेल स्वास्थ्य के लिए घातक

तिलोई मेडिकल कॉलेज के डॉ. शुभम पांडेय ने बताया कि दूषित भोजन और खराब गुणवत्ता वाले अथवा कड़ाही में बार-बार गर्म किए गए तेल में बने खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट में संक्रमण और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने त्योहारों और मेलों के सीजन में खुले में बिकने वाले चाट-पकौड़े और अस्वच्छ भोजन से बचने की अपील की है।