October 17, 2026

TNC Live TV

No.1 News Channel Of UP

एससी-एसटी एक्ट के मामले में आरोपी दोषमुक्त, झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वाले वादी पर ही चलेगी अदालत की तलवार


गोंडा।
विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट आलोक शर्मा की अदालत ने नौ साल पुराने एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मारपीट और जातिसूचक गाली देने के आरोप में नामजद आरोपी इंद्रदेव उर्फ कोतवाल को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने न्याय व्यवस्था का समय बर्बाद करने और झूठी गवाही देने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए वादी (शिकायतकर्ता) के खिलाफ ही कार्रवाई करने के लिए प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश जारी किया है।
साइकिल से गिरकर लगी थी चोट, रंजिशन दर्ज कराया था मुकदमा

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मामला 19 जून 2016 का है। गोनई गोसाई पुरवा के रहने वाले रिंकू ने करनैलगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि बृजमोहन और इंद्रदेव उर्फ कोतवाल ने अन्य साथियों के साथ मिलकर उसके घर में घुसकर मारपीट की और उसे जातिसूचक गालियां दीं। इस मामले की लंबी सुनवाई के दौरान एक आरोपी बृजमोहन की मौत हो गई।
मामले में नया मोड़ तब आया जब खुद वादी रिंकू अदालत में अपने ही आरोपों से मुकर गया। उसने स्वीकार किया कि वह साइकिल से गड्ढे में गिरकर घायल हुआ था। मामले के अन्य गवाहों ने भी पुलिस की कहानी और अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया। हालांकि चिकित्सकीय रिपोर्ट (मेडिकल) में चोटों का जिक्र था, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि ये चोटें आरोपी ने पहुंचाई थीं।
संदेह का लाभ देकर आरोपी बरी, धारा 344 के तहत वादी फंसेगा
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और गवाहों के बयानों के बाद पाया कि आरोपी के खिलाफ कोई पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं है। इसके बाद अदालत ने इंद्रदेव उर्फ कोतवाल को संदेह का लाभ देते हुए बाइज्जत बरी कर दिया। वहीं, झूठा मुकदमा दर्ज कराकर अदालत को गुमराह करने पर कड़ा संदेश देते हुए विशेष न्यायाधीश ने वादी रिंकू के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 344 के तहत सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया।