
कैंसर, मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी में प्रयोग की जाने वाली 17 दवाओं से बेसिक कस्टम डयूटी हटाने के फैसले से मरीजों को बड़ी राहत होगी। दवाएं सस्ती हो जाएंगी। इसका फायदा करीब एक लाख मरीजों को मिलेगा। इनमें 50 हजार कैंसर पीड़ित और इतने ही मधुमेह की चपेट में आते हैं। यह संख्या वो है जिनमें जांच के बाद पुष्टि होती है। ओपीडी में आने वाले मधुमेह पीड़ितों की संख्या ज्यादा होती है।
आईएमएस बीएचयू के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि कैंसर से ग्रसित मरीजों का चिकित्सा संस्थानों और निजी अस्पतालों में इलाज होता है। कुछ दवाइयां ऐसी होती हैं जो विदेश से आती हैं। इन पर कस्टम डयूटी अपेक्षाकृत अधिक होने की वजह से उसका दाम बढ़ जाता है। बजट में कस्टम डयूटी हटने की वजह से मरीजों को दवाइयां भी सस्ती मिलेंगी।
इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रो. एनके अग्रवाल के अनुसार साल दर साल मधुमेह के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। करीब 50 हजार से अधिक मरीज हर साल बीएचयू सहित अन्य अस्पतालों को मिलाकर इलाज कराने आते हैं। इन मरीजों को भी दवाओं के खरीदने में राहत होगी।
जिला अस्पतालों में इमरजेंसी, ट्रॉमा केयर सुविधाएं बढ़ने से बीएचयू पर कम होगा दबाव
बजट विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने वाला साबित होगा। कैंसर की दवाओं के सस्ता होने के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की स्थापना का लाभ भी मरीजों को मिलेगा। जिला अस्पताल में इमरजेंसी, ट्रॉमा केयर सुविधाओं में बढ़ोतरी का फैसला जीवनरक्षक सिद्ध होगा। -डॉ. अनुराग टंडन, अध्यक्ष, आईएमए
स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस साल जो बजट का प्रावधान किया गया है, वह पिछले साल के बजट से 10 फीसदी अधिक है। कैंसर, मधुमेह से जुड़ी दवाइयों से टैक्स घटाने से दवाइयां सस्ती होंगी। अगर निजी चिकित्सकों के लिए टैक्स में कोई विशेष छूट, मेडिकल उपकरणों के खरीद पर रियायत मिलती तो और राहत होती। -डॉ. संजय राय, पूर्व अध्यक्ष, आईएमए
