
मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक के इमाम मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने बताया कि शाबान माह की 15वीं रात को शब-ए-बरात मनाई जाती है। इसे गुनाहों से निजात की रात कहा जाता है। इस रात अल्लाह की इबादत, कुरआन की तिलावत और दुआ का विशेष महत्व है। उन्होंने लोगों से अपील की कि आतिशबाजी, बाइक स्टंट और फिजूल गतिविधियों से बचें।
शिक्षक आसिफ महमूद ने बताया कि हजरत मुबारक खां शहीद कब्रिस्तान, कच्ची बाग, निजामपुर, बहरामपुर, गोरखनाथ, रसूलपुर और हजारीपुर स्थित कब्रिस्तानों में लाइट लगाई गई हैं। लोग अपने पूर्वजों की कब्रों की सफाई कर चुके हैं। इस मौके पर कुरआन ख्वानी, फातिहा और दुआ की जाएगी। गरीबों को भोजन कराया जाएगा और हलवा बांटा जाएगा। मस्जिदों और घरों में इबादत की जाएगी। कब्रिस्तानों और दरगाहों पर जाकर जियारत कर पूर्वजों की मगफिरत की दुआ मांगेंगे। हजरत नक्को शाह बाबा, हजरत कंकड़ शहीद, हजरत अली बहादुर शाह, हजरत तोता मैना शाह सहित अन्य दरगाहों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। लोग देर रात तक नफ्ल नमाज और तिलावत करेंगे तथा अगले दिन रोजा रखेंगे।
मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि शब-ए-बरात की रात बड़ी रहमत और बरकत वाली होती है। इस रात इबादत करने और दिन में रोजा रखने की हदीस में फजीलत बयान की गई है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि बेवजह घूमने और आतिशबाजी से बचें। शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि शब-ए-बरात की रात खूब इबादत करनी चाहिए।
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