यूपी में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है, और 13 जनवरी 2026 को में प्रकाशित खबर के अनुसार समाजवादी पार्टी (सपा) ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सपा ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया में बेईमानी हो रही है और वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया जा रहा है।
सपा का आरोप क्या था?
सपा ने एक्स (पूर्व Twitter) पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि एक भाजपा विधायक ने स्वीकार किया है कि “एक हफ्ते में 18 हजार से अधिक वोट बढ़वा लिए गए हैं”। सपा ने इसे “भाजपा विधायक की स्वीकारोक्ति” बताते हुए चुनाव आयोग पर पक्षपात और SIR में बेईमानी का आरोप लगाया। यह आरोप ऐसे समय में आया जब यूपी में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (6 जनवरी 2026 को जारी) में करीब 2.89 करोड़ नाम कट चुके हैं, जिससे विपक्ष (खासकर सपा) में बेचैनी है। सपा का मानना है कि यह प्रक्रिया उनके मजबूत क्षेत्रों में वोटरों को प्रभावित करने की साजिश है।
चुनाव आयोग का जवाब
चुनाव आयोग ने भी एक्स पर ही सपा के इस पोस्ट का रिप्लाई देकर स्पष्ट और नसीहत भरा जवाब दिया। आयोग ने लिखा:
“सशंकित होने की आवश्यकता नहीं है। एक सप्ताह में संबंधित विधानसभा में वोटरों का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए मात्र 14707 फॉर्म-6 ही दर्ज हुए हैं। 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद से अब तक इस विधानसभा में एक भी वोट नहीं बढ़ा है। बिना वास्तविकता की पड़ताल किए किसी के बयान मात्र के आधार पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह करना अन्यायपूर्ण है।”
यह जवाब सीधे तौर पर भाजपा विधायक के दावे (18,000+ वोट बढ़ाने) को खारिज करता है और दिखाता है कि ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद कोई नया नाम नहीं जोड़ा गया है। फॉर्म-6 की संख्या सिर्फ 14,707 है, जो 18,000 के दावे से काफी कम है।
बड़ा संदर्भ
- यूपी में SIR के तहत कुल 15.44 करोड़ से घटकर ड्राफ्ट रोल में 12.55 करोड़ वोटर बचे हैं (करीब 18-19% डिलीशन)।
- विपक्ष (सपा, कांग्रेस आदि) इसे “वोट चोरी” या चुनिंदा तरीके से नाम काटने का मामला बता रहा है, जबकि आयोग इसे रूटीन क्लीनअप (मृतक, माइग्रेंट, डुप्लिकेट आदि हटाना) कहता है।
- क्लेम्स और ऑब्जेक्शन्स का समय 6 फरवरी 2026 तक है, और फाइनल लिस्ट 6 मार्च 2026 को आएगी। इससे पहले वोटर अपने नाम जुड़वा सकते हैं।
यह घटना 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में ट्रस्ट और वोटर लिस्ट की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। सपा लगातार आयोग से पारदर्शिता की मांग कर रही है, जबकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई पक्षपात नहीं है। अगर आपके पास कोई विशिष्ट विधानसभा या और डिटेल्स हैं, तो और गहराई से बता सकता हूं!

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