February 11, 2026

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मथुरा से मदुरई तक मंदिर यात्रा पर निकलीं राजश्री चौधरी, बोलीं- नकली संतों से सनातन को खतरा

Rajshree Chaudhary embarked on temple tour from Mathura to Madurai arrived in varanasi

अखिल भारत हिंदू महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजश्री चौधरी मथुरा से मदुरई तक मंदिर भ्रमण पर निकलीं हैं। कहा कि आज सनातन धर्म सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है और इसकी एक बड़ी वजह नकली संतों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि संत समाज की भी पहचान तय होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन सच्चा और कौन धर्म की आड़ में राजनीति और स्वार्थ के लिए साधु का भेष धारण किए हैं। उन्होंने धर्म, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर हमला बोला है

राजर्षि चौधरी ने कहा कि आज कुछ लोग साधु का चोला पहनकर समाज को भ्रमित कर रहे हैं और राजनीतिक संरक्षण के बल पर धर्म की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर समय रहते असली और नकली संतों में फर्क नहीं किया गया, तो सनातन परंपरा कमजोर होगी और इसका सीधा फायदा धर्म विरोधी ताकतों को मिलेगा।
गौहत्या के मुद्दे पर उन्होंने सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कागजों में कानून बनाकर गौमाता की रक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की कि गौहत्या को लेकर बने कानूनों को और सख्त किया जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। राजर्षि चौधरी ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव और तुष्टिकरण की नीति के चलते कई राज्यों में गौहत्या के मामलों पर ढील दी जाती है, जो हिंदू समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।

यूजीसी नियमावली में फेरबदल के सवाल पर राजर्षि चौधरी ने जातिगत राजनीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश को जाति-पात में उलझाकर रखने की कोशिशें लगातार हो रही हैं, जबकि सरकारों को विकास और शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा को वोट बैंक की राजनीति का हथियार बना दिया गया है, जिससे युवाओं का भविष्य अधर में लटक रहा है। जाति के नाम पर फैसले लेने से न तो विश्वविद्यालय मजबूत होंगे और न ही भारत विश्वगुरु बन पाएगा।

काशी में अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को लेकर उठे विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को विकास के नाम पर इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर जैसी महान शासिका केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि हिंदू स्वाभिमान का प्रतीक हैं। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बिना समाज से संवाद किए फैसले लेना सरकार के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

राजर्षि चौधरी ने कहा कि उनकी यह यात्रा केवल मंदिर दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंदू समाज को राजनीतिक और सामाजिक रूप से जागरूक करने का अभियान है।