उत्तराखंड में बेरोजगारी की सच्ची तस्वीर सामने लाने के लिए केंद्र सरकार का पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) या आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण प्रदेश भर में शुरू हो रहा है। यह सर्वे 11 फरवरी 2026 से शुरू होकर दिसंबर 2026 तक चलेगा।
मुख्य उद्देश्य
यह सर्वेक्षण रोजगार और बेरोजगारी की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करेगा। इससे पता चलेगा:
- कितने लोग रोजगार में हैं।
- कितने लोग काम की तलाश में हैं।
- श्रम बल भागीदारी दर (LFPR), वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR), बेरोजगारी दर (UR) और करेंट वीकली स्टेटस (CWS) जैसे महत्वपूर्ण संकेतक। इन आंकड़ों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारें भविष्य की रोजगार योजनाएं और आर्थिक नीतियां तय करेंगी।
सर्वे का दायरा और तरीका
- अवधि: फरवरी से दिसंबर 2026 (कुछ रिपोर्टों में 11 फरवरी से शुरू होने की पुष्टि)।
- क्षेत्र: पूरे उत्तराखंड में ग्रामीण और शहरी दोनों इलाके।
- उदाहरण (पौड़ी जनपद): कुल 28 इकाइयां चयनित — 16 ग्रामीण और 12 नगरीय।
- प्रक्रिया: विभागीय कर्मचारी घर-घर जाकर कंप्यूटर एसिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (CAPI) के माध्यम से डेटा ऑनलाइन दर्ज करेंगे। मुखिया, परिवार के सदस्यों, शिक्षा, रोजगार आदि की जानकारी ली जाएगी।
- डेटा: जनसंख्या के सापेक्ष बेरोजगारी, रोजगार और श्रम शक्ति का प्रमाणित आंकड़ा पहले राज्य सरकार को, फिर केंद्र को भेजा जाएगा।
सर्वे में शामिल प्रमुख मानक
- आयु वर्ग: 15 से 59 वर्ष के स्वस्थ लोग जो काम करने के इच्छुक हैं।
- जानकारी: शिक्षा, रोजगारी/बेरोजगारी, मासिक पारिवारिक व्यय।
- काम का आकलन: पिछले 365 दिनों, एक महीने और एक सप्ताह में कितना काम किया।
- एक घंटा भी काम करने वाला व्यक्ति रोजगार श्रेणी में शामिल।
- कोई भी आर्थिक गतिविधि से कमाई को रोजगार माना जाएगा।
वर्तमान संदर्भ
हालिया PLFS डेटा (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के अनुसार:
- भारत में कुल बेरोजगारी दर 4.8% रही (ग्रामीण 4%, शहरी 6.7%)।
- लेकिन उत्तराखंड में बेरोजगारी दर सबसे ऊंची रही — 8.5% (तृतीय तिमाही में), और जुलाई-सितंबर 2025 में 8.9% तक पहुंची थी। यह सर्वे उत्तराखंड की उच्च बेरोजगारी (खासकर शहरी और युवाओं/महिलाओं में) की गहराई समझने में मदद करेगा।
अधिकारी का बयान
राम सलोने, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, पौड़ी: “केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों पर सर्वे 11 फरवरी से शुरू होगा। सभी कार्य CAPI के माध्यम से होंगे। रोजगार/आजीविका का व्यापक अध्ययन किया जाएगा।”
यह सर्वे उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे राज्य की रोजगार नीतियों को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। आंकड़े आने पर बेरोजगारी की असली स्थिति स्पष्ट होगी।

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