February 12, 2026

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नौसेना की गौरवशाली तस्वीर है कुरसुरा पनडुब्बी, 1971 के भारत-पाक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

विशाखापट्टनम में स्थित आईएनएस कुरसुरा पनडुब्बी संग्रहालय भारतीय नौसेना की गौरवशाली विरासत का जीवंत प्रतीक है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली यह ऐतिहासिक पनडुब्बी आज पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बनी हुई है।

मुख्य जानकारी:

  • आईएनएस कुरसुरा (S-20): सोवियत संघ (रूस) से खरीदी गई फॉक्सट्रॉट-क्लास (कलवरी-क्लास) डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी।
  • कमीशन: 18 दिसंबर 1969 को भारतीय नौसेना में शामिल।
  • सेवा अवधि: 31 वर्षों तक सक्रिय सेवा (1969 से 2001 तक)।
  • विशेष भूमिका: 1971 के भारत-पाक युद्ध में अरब सागर में गश्त और निगरानी मिशन पर तैनात रही। यह दुश्मन जहाजों की निगरानी, संभावित हमलों की रोकथाम और समुद्री क्षेत्र में भारत की उपस्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण रही। युद्ध के दौरान पनडुब्बी ने सख्त नियमों (जैसे शिपिंग कॉरिडोर न पार करना और पॉजिटिव आईडेंटिफिकेशन के बाद ही हमला) के तहत काम किया।
  • तकनीकी विशेषताएं:
    • लंबाई: 91.3 मीटर
    • वजन: लगभग 1,945-2,000 टन
    • गहराई क्षमता: 280 मीटर तक
    • पानी के नीचे रहने की क्षमता: 48 दिन तक
    • हथियार: 22 टॉरपीडो और माइंस
    • सिस्टम: सोनार (दुश्मनों की निगरानी के लिए), रडार, टॉरपीडो लॉन्चर
    • कंपार्टमेंट: 7 अलग-अलग कम्पार्टमेंट (कमांड रूम, क्रू क्वार्टर, इंजन रूम, टॉरपीडो कक्ष आदि)

संग्रहालय के रूप में:

  • सेवामुक्त: 28 फरवरी 2001 (कुछ स्रोतों में 27 सितंबर 2001 भी उल्लेखित)।
  • संग्रहालय: 24 अगस्त 2002 से RK बीच (रामकृष्णा बीच), विशाखापट्टनम पर जनता के लिए खोला गया।
  • खासियत: दक्षिण एशिया का पहला और विश्व का दूसरा पनडुब्बी संग्रहालय। मूल रूप से संरक्षित होने के कारण पर्यटकों के बीच “मस्ट-विजिट” जगह मानी जाती है।
  • अंदर का अनुभव: पर्यटक टॉरपीडो कक्ष, कमांड रूम, क्रू क्वार्टर और इंजन रूम देख सकते हैं। पूर्व नौसैनिक अधिकारी (जैसे सब लेफ्टिनेंट अनिल चौधरी) संचालन, रणनीति और तकनीकी क्षमताओं की जानकारी देते हैं

वर्तमान स्थिति:

यह संग्रहालय नौसेना की शक्ति, इतिहास और बलिदान को जीवंत रखता है। हाल के वर्षों में यहां नौसेना बैंड परफॉर्मेंस और अन्य कार्यक्रम होते रहते हैं। विशाखापट्टनम में यह अन्य नौसैनिक संग्रहालयों (जैसे TU-142 विमान) के साथ एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यह पनडुब्बी न केवल युद्ध की याद दिलाती है, बल्कि भारतीय नौसेना के साहस और तकनीकी कौशल का प्रतीक बनी हुई है। अगर आप विशाखापट्टनम जाएं, तो इसे जरूर देखें—यह एक अनोखा अनुभव है!