February 12, 2026

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यूजीसी के नए नियमों को लागू करने की मांग कर किया प्रदर्शन

लखनऊ में यूजीसी (University Grants Commission) के नए नियमों (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर सामाजिक न्याय मोर्चा ने बुधवार को बड़ा प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कलेक्ट्रेट से परिवर्तन चौक तक पैदल मार्च के रूप में निकाला गया, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों और अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया।

प्रदर्शन की मुख्य मांगें (छह सूत्रीय मांग पत्र):

  • यूजीसी नियमावली 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में तुरंत लागू किया जाए, ताकि समता (equity) और भेदभाव-मुक्त शिक्षा सुनिश्चित हो।
  • ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण को असंवैधानिक बताते हुए समाप्त किया जाए।
  • सभी श्रेणियों (SC, ST, OBC आदि) में आरक्षण कोटा पूरा किया जाए।
  • उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
  • अन्य संबंधित मांगें, जैसे समावेशी शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों का पालन।

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से भेजा। मार्च का नेतृत्व मोर्चा के संयोजक रमा शंकर भीम एडवोकेट ने किया। इसमें शामिल प्रमुख लोग:

  • अखिल भारतीय पासी समाज के राष्ट्रीय महासचिव रामकृपाल एडवोकेट,
  • राष्ट्रीय कल्याण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद रावत,
  • डॉ. मोहन लाल रावत,
  • राम कृपाल,
  • बीपी अशोक,
  • अनोध रावत आदि।

यूजीसी 2026 नियमों का संक्षिप्त पृष्ठभूमि:

ये नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए थे, जो 2012 के पुराने नियमों की जगह लेते हैं। मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) में जाति, लिंग, धर्म, विकलांगता आदि आधारित भेदभाव को खत्म करना और समावेश को बढ़ावा देना है। प्रमुख प्रावधान:

  • सभी संस्थानों में इक्विटी कमेटी (Equity Committee) बनाना अनिवार्य, जिसमें SC, ST, OBC, PwD, महिलाओं आदि का प्रतिनिधित्व हो।
  • भेदभाव की शिकायतों पर समयबद्ध जांच और कार्रवाई।
  • SC, ST, OBC के खिलाफ भेदभाव पर विशेष फोकस।
  • मोबाइल इक्विटी स्क्वाड, हेल्पलाइन आदि व्यवस्थाएं।

ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आए, जहां छात्र सुसाइड और जातिगत भेदभाव के मामलों पर सुनवाई चल रही है। हालांकि, नियमों को लेकर देशभर में विरोध भी हुआ—कई छात्र संगठनों (खासकर जनरल कैटेगरी से) ने इसे “एकतरफा” और “दुरुपयोग” की आशंका बताकर विरोध किया, जिसके बाद 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी।

लखनऊ में प्रदर्शन का संदर्भ:

यह प्रदर्शन यूजीसी नियमों के समर्थन में है, जबकि जनवरी 2026 में लखनऊ यूनिवर्सिटी समेत कई जगहों पर इनके विरोध में बड़े प्रदर्शन हुए थे (जैसे नियमों को “काला कानून” बताना, प्रतियां जलाना)। सामाजिक न्याय मोर्चा का यह आंदोलन पिछड़े और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा और नियमों के क्रियान्वयन की मांग करता है।

यह घटना उच्च शिक्षा में समानता, आरक्षण और भेदभाव के मुद्दे पर चल रही बहस को और तेज करती है। आगे क्या होता है, यह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।