February 12, 2026

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10 मंजिला ओपीडी और नया चेस्ट हॉस्पिटल बनेगा; मरीजों के लिए बढ़ेंगी सुविधाएं

Kanpur GSVM receives budget booster 10 story OPD and new chest hospital will built patient facilities enhanced

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को यूपी के बजट से ओपीडी ब्लॉक और नए चेस्ट हॉस्पिटल का तोहफा मिला है। इससे शहर के साथ ही आसपास के जिलों के रोगियों को लाभ मिलेगा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि इससे अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ेंगी। साथ ही कॉलेज में विभिन्न नए मद खुल गए हैं जो अभी तक नहीं थे। इसका भी फायदा होगा। उपकरणों का बजट 15 से 20 करोड़ रुपये हो गया है।

डॉ. काला ने बताया कि ओपीडी ब्लॉक 10 तल का रहेगा। इसमें अलग-अलग तल पर विभागों की ओपीडी रहेगी। साथ ही इसमें नए क्लीनिक खोले जाएंगे। इनमें रोगियों को विशेषज्ञता पूर्ण इलाज मिलेगा। शासन को जो प्रस्ताव भेजा गया था, उसमें पूरे प्रोजेक्ट का अनुमानित बजट 180.30 करोड़ बताया गया था। इस मद में 15 करोड़ की धनराशि से शुरुआत हो गई है।

बजट में उपकरणों की धनराशि भी बढ़ाई
इसके साथ ही डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल परिसर में एक नए छह मंजिला चेस्ट हॉस्पिटल के बनने का रास्ता भी साफ हो गया है। बीते साल यह प्रस्ताव भेजा गया था। इसका अनुमानित बजट 49 करोड़ है। 30 प्रतिशत धनराशि बजट में मिल गई है। इससे काम शुरू हो जाएगा। बाद मे किस्तें मिलती रहेंगी। साथ ही बजट में उपकरणों की धनराशि भी बढ़ाई गई है। अब तक उपकरणों की खरीद का बजट 15 करोड़ रुपये था।

मेडिकल कॉलेज का फंड भी बढ़ेगा
इसे बढ़ाकर 20 करोड़ कर दिया गया है। इससे विभागों में संसाधन बढ़ेंगे। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज का फंड भी बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि शासन ने कॉलेज में मदों की संख्या बढ़ा दी है। अब करीब 56 मद हो गए हैं। इनमें 10 मद बड़े हैं। इनमें अभी थोड़ी धनराशि दी गई है, लेकिन इसमें हर साल इजाफा होता रहेगा। इससे कॉलेज के कार्यों में आसानी आएगी

ओपीडी ब्लॉक पांच फायदे

  • रोगियों और तीमारदारों के बैठने के लिए लाउंज रहेगा।
  • ओपीडी में ऑपरेशन थिएटर रहेंगे, कक्षाएं भी चलेंगी।
  • डेंटल विभाग शिफ्ट होगा, वार्ड और ओटी रहेंगे।
  • त्वचा रोग विभाग शिफ्ट होगा, वार्ड ओटी रहेंगे।
  • नेत्र रोग के विशेषज्ञता वाले क्लीनिक शुरू होंगे।

चेस्ट हॉस्पिटल पांच फायदे

  • वक्ष रोगियों के लिए मल्टीपल आईसीयू की व्यवस्था।
  • ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था रहेगी।
  • अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था होगी।
  • टीबी और सामान्य सांस के रोगियों को अलग-अलग देखा जाएगा।
  • वार्डों और लेक्चर थिएटर की संख्या बढ़ेगी।