February 18, 2026

TNC Live TV

No.1 News Channel Of UP

सरकारी अस्पतालों में शाम ढलते ही थम जाती हैं मशीनें, इंतजार या निजी केंद्र का रुख करें मरीज

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सरकारी अस्पतालों की एक बड़ी समस्या सामने आई है – शाम ढलते ही अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एक्स-रे जैसी महत्वपूर्ण जांच मशीनें बंद हो जाती हैं!  की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि मरीजों को या तो निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ता है (जहां खर्चा ज्यादा होता है) या अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है। यह स्थिति जिला अस्पतालों से लेकर सीएचसी स्तर तक है, जहां आपातकालीन मरीजों को भी 24 घंटे सुविधा नहीं मिल पाती।

मुख्य समस्याएं और उदाहरण

  • बलरामपुर अस्पताल: सीटी स्कैन मशीन है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की रात की ड्यूटी नहीं होने से शाम के बाद जांच मुश्किल। सीएमएस डॉ. हिमांशु के अनुसार, रात 10 बजे तक सुविधा मिलती है और जरूरी मामलों में ऑन-कॉल बुलाया जाता है।
  • ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय: रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी यूनिट रात में बंद। तीन टेक्नीशियन होने के बावजूद सुविधा नहीं।
  • रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय: रात में एक्स-रे बंद, लेकिन ऑन-कॉल टेक्नीशियन बुलाकर जांच संभव।
  • सीएचसी स्तर: 20 सीएचसी में से सिर्फ 11 में एक्स-रे सुविधा, लेकिन रात में नहीं। दुर्घटना के घायलों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। पैथोलॉजी जांच भी रात में उपलब्ध नहीं।
  • कारण: अस्पताल प्रभारियों का कहना है कि मैनपावर की कमी (टेक्नीशियन, रेडियोलॉजिस्ट) से 24 घंटे चलाना मुश्किल।

सकारात्मक पक्ष – पीपीपी मॉडल की सफलता

कुछ अस्पतालों में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर सीटी स्कैन मशीनें हैं, जैसे सिविल अस्पताल और लोकबंधु अस्पताल, जहां 24 घंटे जांच उपलब्ध है। यहां शिफ्ट सिस्टम से टेक्नीशियन तैनात रहते हैं, जिससे मरीजों को राहत मिलती है।

प्रभाव और सवाल

  • आपात स्थिति में (दुर्घटना, गंभीर मरीज) देरी जानलेवा हो सकती है।
  • गरीब मरीजों पर बोझ बढ़ता है, क्योंकि निजी केंद्र महंगे हैं।
  • यह समस्या सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं – अन्य जिलों (जैसे वाराणसी, कानपुर, बाराबंकी) में भी सीटी स्कैन/एक्स-रे मशीनें खराब रहने या सुविधा न होने की खबरें आती रहती हैं।

सरकार ने हाल के वर्षों में स्वास्थ्य बजट बढ़ाया है, नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्टाफ और 24×7 सुविधा की कमी अभी बरकरार है। यह पड़ताल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत पर जोर देती है – ताकि सरकारी अस्पताल वाकई ‘आम आदमी’ के लिए 24 घंटे उपलब्ध हों।