March 3, 2026

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हिंसक कुत्तों को रोकने के लिए शेल्टर होम अभी कागज पर

Shelter homes to prevent violent dogs are still on paper.
लखनऊ। राजधानी की सड़कों पर दौड़ते और मासूमों को निशाना बनाते आवारा कुत्तों पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश भी बेअसर साबित हो रहे हैं। कोर्ट ने चार महीने पहले सार्वजनिक स्थलों से कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में रखने का निर्देश दिया था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नगर निगम अब तक केवल जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया में ही उलझा हुआ है।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया था कि शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थलों से लावारिस कुत्तों को तुरंत हटाया जाए।

जरूरत 30 की, तैयारी सिर्फ दो की

शहर में आवारा कुत्तों की संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक शेल्टर होम में अधिकतम 5000 कुत्ते ही रखे जा सकते हैं। इस लिहाज से पूरे शहर के लिए कम से कम 30 शेल्टर होम की आवश्यकता है। नए बजट में प्रावधान के बावजूद निगम केवल दो शेल्टर होम बनाने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम के अफसरों का मानना है कि सभी डेढ़ लाख कुत्तों को रखने की जरूरत नहीं है, बल्कि केवल हिंसक चिह्नित कुत्तों को ही वहां शिफ्ट किया जाएगा।

बजट तो मिला, पर काम नहीं
नगर निगम ने नए साल के बजट में इन शेल्टर होम के लिए फंड आवंटित किया है, लेकिन निर्माण की धीमी रफ्तार को देखते हुए अगले एक-दो महीनों में राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। तब तक शहरवासी हिंसक कुत्तों और रेबीज के साये में जीने को मजबूर हैं।