
रजबी रोड फूलवाली गली स्थित हुसैनी फेडरेशन के कार्यालय में खामनेई की याद में जलसे का आयोजन किया गया। चेयरमैन हाजी कबीर जैदी ने कहा कि दुनिया में बढ़ते जुल्म और बेइंसाफी के खिलाफ आवाज बुलंद करना वक्त की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। खामनेई ने कठिन संघर्षों और चुनौतियों का सामना धैर्य और दृढ़ता से किया और सत्य पर टिके रहे। डॉ. जुल्फिकार अली ने कहा कि शहादत किसी शिकस्त का नाम नहीं बल्कि हक की राह में सबसे बुलंद मकाम है। इस मौके पर कमर अब्बास रिजवी, एहसान हुसैन, रजी अब्बास रिजवी, मुशर्रफ हुसैन रिजवी, इसरार हुसैन जैदी, मो. असगर आदि मौजूद रहे। रजबी रोड स्थित मस्जिद और पीली कालोनी स्थित मस्जिदों व इमामबारगाहों में विरोध जताया गया। ग्वालटोली, पटकापुर के इमामबाड़ों में महिलाओं ने भी मजलिस की और खामनेई की मौत को शहादत बताया।
बड़ी कर्बला में रात आठ बजे लोग शांतिपूर्ण विरोध करने पहुंचे। यहां लोगों ने हाथों में खामनेई की फोटो और मोमबत्तियां लेकर विरोध जताया। मजलिस को मौलाना नुसरत आब्दी ने खिताब किया। उन्होंने खामनेई के जिंदगी उनके संघर्षों, नेतृत्व के बारे में कहा कि वे अपने सिद्धांतों और विश्वासों पर अटल रहे। अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। इसके बाद अंजुमन रिजविया और हुसैनी ब्रदर्स ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की। लोग लगातार मातम करते रहे और कुछ लोग तो रोते-रोते बेहोश भी हो गए। यहां इब्ने हसन जैदी, काशिफ नकवी, मौलाना नाजिम नजफी, कफील कुरैशी, मौलाना नुसरत आब्दी, मोईन चिश्ती आदि मौजूद रहे।

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