लखनऊ
उत्तर प्रदेश पुलिस की यूपी-112 सेवा महिलाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अगर कोई महिला या युवती रात में बाहर हो और घर लौटते समय असुरक्षा महसूस करे, तो वह बेझिझक 112 पर कॉल कर सकती है। पुलिस की पीआरवी (पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल) तुरंत पहुंचकर उसे सुरक्षित घर या गंतव्य तक पहुंचाती है।
यूपी-112 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 1120 महिलाओं को पीआरवी के माध्यम से एस्कॉर्ट कर सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया। इसका मतलब है कि औसतन रोजाना करीब तीन महिलाओं ने इस सुविधा का लाभ उठाया।
यूपी-112 की एडीजी नीरा रावत ने बताया कि यह योजना लंबे समय से चल रही है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने कहा, “कोई भी महिला झिझकें बिना इमरजेंसी नंबर पर कॉल कर सकती है। यूपी पुलिस उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हुए उसे घर तक पहुंचाएगी।”
रेस्पॉन्स टाइम हुआ आधा
पुलिस की त्वरित कार्रवाई का प्रमाण यह है कि पीआरवी का रेस्पॉन्स टाइम पिछले पांच वर्षों में आधा हो गया है।
- 2020 में औसत रेस्पॉन्स टाइम: 12 मिनट 34 सेकंड
- 2025 में: 6 मिनट 51 सेकंड
इसका मतलब है कि अब पुलिस पहले की तुलना में दोगुनी तेजी से घटनास्थल पर पहुंच रही है। बीते वर्ष कंट्रोल रूम में रोजाना औसतन 34,124 आपात कॉल्स आईं, जबकि कुल 3 करोड़ 10 लाख 87 हजार 583 कॉल्स अटेंड की गईं।
पशु-पक्षियों और बच्चों की भी मदद
महिलाओं की सुरक्षा के अलावा पीआरवी कर्मियों ने मानवीयता का परिचय देते हुए अन्य क्षेत्रों में भी सहायता की:
- 91,436 मामलों में पशु-पक्षियों का रेस्क्यू किया गया।
- 14,422 गुमशुदा बच्चों की मदद की गई।
यूपी पुलिस की यह पहल महिलाओं में सुरक्षा की भावना जगाने के साथ-साथ समाज सेवा का उदाहरण भी पेश कर रही है। महिलाओं से अपील है कि असुरक्षा महसूस होने पर तुरंत 112 डायल करें – पुलिस आपकी ढाल बनेगी।

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