
इस मॉडल के माध्यम से वृद्धजनों से संबंधित मुद्दों की ओर सरकार और समाज का ध्यान आकर्षित किया जा सकेगा। साथ ही सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं इस प्रारूप को अपनाकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों में बुजुर्गों के लिए बेहतर सेवाएं और सुविधाएं शामिल कर सकेंगी। यह मॉडल वृद्धावस्था से जुड़े विषयों पर शोध करने वाले शोधकर्ताओं को भी व्यापक स्तर पर काम करने की नई दिशा देगा।
डॉ. श्याम सिंह ने बताया कि इस मॉडल को शोध के साथ विकसित करने में करीब पांच वर्ष का समय लगा। करीब 50 पृष्ठों के इस मॉडल में ऐसे कई बिंदु और सुझाव शामिल किए गए हैं, जिनके आधार पर बुजुर्गों के लिए बनाई जाने वाली सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा जा सकता है।
कोट
यह मॉडल वृद्धजनों की समस्याओं के समाधान की दिशा में उपयोगी साबित होगा। इस तरह के शोध विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता को मजबूत करते हैं और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाते हैं।
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