केंद्रीय बजट 2026-27 में लेदर इंडस्ट्री को अमेरिकी टैरिफ जैसी चुनौतियों के बीच महत्वपूर्ण राहत मिली है। की इस खबर के अनुसार, कस्टम नियमों में सरलीकरण, ड्यूटी-फ्री इनपुट्स का विस्तार, एफडीआई में संशोधन और एमएसएमई सपोर्ट से यूपी के लेदर सेक्टर को मजबूती मिलेगी। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले तीन साल में बाजार में 5,000 करोड़ रुपये का उछाल आएगा और 3,000 करोड़ रुपये का नया विदेशी निवेश आएगा, जिससे हजारों रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्य घोषणाएं और यूपी पर प्रभाव
- एमएसएमई को मजबूती: लेदर इंडस्ट्री की 95-98% इकाइयां एमएसएमई हैं। बजट में 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड और ट्रेड स्कीम सरलीकरण से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का बेहतर लाभ मिलेगा। इससे लागत कम होगी और निर्यात बढ़ेगा।
- कस्टम नियमों में सरलीकरण: फैक्टरी-सील कंटेनर सीधे पोर्ट तक जाएंगे, एआई स्कैनर से जांच होगी। इससे निर्यात में 3 दिन की बचत और ट्रांजेक्शन लागत में कमी आएगी। कोरियर में अनलिमिटेड वैल्यू छूट से निर्यात ऑर्डर 20% तक बढ़ सकते हैं।
- ड्यूटी-फ्री इनपुट्स का विस्तार: लेदर/सिंथेटिक फुटवियर के लिए उपलब्ध ड्यूटी-फ्री इनपुट अब शू अपर्स (footwear upper) निर्यातकों तक विस्तारित। ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की समयसीमा 6 महीने से बढ़ाकर 1 साल कर दी गई, जो लेदर, टेक्सटाइल गारमेंट्स और अन्य लेदर प्रोडक्ट्स पर लागू होगी। क्रस्ट/फिनिश्ड लेदर पर ड्यूटी में कुछ कमी आई है, लेकिन पूरी छूट नहीं मिली।
- एफडीआई और डिजाइन में बढ़ावा: फेमा संशोधन से फुटवियर सेक्टर में सीधा विदेशी निवेश आसान होगा, अगले सालों में 20% ग्रोथ का अनुमान। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की स्थापना से घरेलू डिजाइन क्षमता बढ़ेगी और युवाओं को रोजगार मिलेगा। फोकस प्रोडक्ट स्कीम से डिजाइन, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और मशीनरी को सपोर्ट मिलेगा।
- यूपी का लेदर बाजार:
- देश का कुल लेदर निर्यात: 46,000 करोड़ रुपये
- यूपी से निर्यात: 15,000 करोड़ रुपये
- यूपी का घरेलू कारोबार: 20,000 करोड़ रुपये
- नए बदलावों से सालाना 15% ग्रोथ की उम्मीद, कुल 10-12% ग्रोथ संभावित।
उद्योग की प्रतिक्रिया
- आर.के. जालान (एफडीडीआई अध्यक्ष, पूर्व चर्म निर्यात परिषद अध्यक्ष): कई मांगें मानी गईं। फुटवियर अपर आयात मंजूरी और समयसीमा बढ़ोतरी बड़ी राहत। ग्रोथ 10-12% रहने की उम्मीद।
- मुख्तारुल अमीन (चर्म निर्यात परिषद पूर्व अध्यक्ष): बजट से काफी फायदा, लेकिन फिनिश्ड लेदर पर ड्यूटी कम नहीं हुई। कस्टम्स संशोधन ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में अच्छा कदम।
अमेरिकी 50% टैरिफ से जूझ रही इंडस्ट्री को ये प्रावधान लागत घटाने, निर्यात बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में मदद करेंगे। यूपी जैसे लेदर हब राज्य (आगरा, कानपुर आदि क्लस्टर) में रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। हालांकि कुछ मांगें (जैसे रॉ हाइड पर ड्यूटी नहीं बढ़ाना) पूरी हुईं, लेकिन फिनिश्ड लेदर ड्यूटी पर इंतजार बाकी है। कुल मिलाकर, बजट लेदर सेक्टर के लिए आंशिक लेकिन सकारात्मक राहत लेकर आया है, जो आत्मनिर्भरता और निर्यात को बल देगा।

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