February 5, 2026

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हाईकोर्ट का अहम फैसला- जातीय रैलियों पर रोक के आदेश का पूरा पालन हो, सामाजिक वैमनस्यता में आएगी कमी

UP: "Order banning caste rallies must be fully complied with", important decision of High Court

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा कि यूपी सरकार के जातीय रैलियों पर रोक के आदेश समेत संबंधित नियम-कानूनों का सख्त और प्रभावी पालन होना चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि बच्चो में अच्छे संस्कार डालना, जातीयता की समस्या का स्थाई समाधान है। इस निर्देश के साथ कोर्ट ने राजनीतिक जातीय रैलियों पर रोक के मामले में वर्ष 2013 में दाखिल जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह फैसला अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर दिया। याची ने प्रदेश में जातीय रैलियों पर रोक के निर्देश देने का आग्रह किया था। याची का कहना था कि वर्ष 2013 में आगामी चुनावों के मद्देनजर अंधाधुंध हो रही जातीय रैलियों से समाज में वैमनस्यता बढ़ रही थी। ऐसे में प्रदेश में चुनाव से पहले इन पर सख्त रोक लगाई जानी चाहिए।

दरअसल, पिछले साल एक अन्य मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने जातीय महिमा मंडन करने को संविधानिक नैतिकता का उल्लंघन करने वाला करार दिया था। साथ ही आपराधिक मामलों के दस्तावेजों में जाति लिखे जाने पर सख्त ऐतराज जताया था। इसके बाद उप्र सरकार ने सितंबर,2025 में जातीयता दर्ज न किए जाने का आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने इसी शासनादेश का सख्ती से प्रभावी पालन किए जाने का निर्देश देकर याचिका निस्तारित कर दी।