
प्रदेश में समावेशी व समान शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल के बजट में स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) की तर्ज पर स्पेशल एजुकेशन जोन (एसईजेड) बनाने की घोषणा की गई थी। लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर समेत आधा दर्जन जिलों में यह एक मॉडल केंद्र के रूप में बनना था। इसके लिए पांच करोड़ का बजट प्रावधान भी किया गया था।
सुविधा उपलब्ध कराने की कवायद की जा रही
इसी क्रम में विभाग की ओर से छात्रों को और बेहतर शिक्षण-प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराने की कवायद की जा रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में एसईजेड की घोषणा की गई थी। इसमें एक ही कैंपस में प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई की व अन्य सुविधाएं मिलनी थी। इसका उद्देश्य एक ही जगह पर युवाओं के लिए आज की जरूरत के अनुरूप आधुनिक शिक्षा व प्रशिक्षण व्यवस्था और आवासीय सुविधा भी देना था।
ताकि उन्हें इसके लिए अलग-अलग जगह पर भटकना न पड़े और वे रोजगार के लिए तैयार हो सकें। राजधानी के मोहान रोड में इसके लिए 785 एकड़ जगह भी चयनित करने की बात कही गई थी।
गोरखपुर व बुंदेलखंड में भी जमीन की तलाश शुरू कर दी गई थी। ताकि युवाओं को इस योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके। किंतु यहां पढ़ाई व प्रशिक्षण के इच्छुक युवा इसके लिए इंतजार ही करते रहे गए और एक साल में यह योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी है। इस बारे में उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमपी अग्रवाल से संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
पांच छात्रों को मिला छात्रवृत्ति योजना का लाभ
प्रदेश के छात्रों को विदेश में पढ़ाई में सहयोग के लिए ”द शेवनिंग उत्तर प्रदेश” के नाम से सरकारी छात्रवृत्ति की भी घोषणा की गई थी। इसमें यूके के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में मास्टर डिग्री के लिए प्रदेश सरकार द्वारा फॉरेन कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस के सहयोग से हर साल पांच छात्रों को छात्रवृत्ति दी जानी थी। इसके लिए दो करोड़ का बजट प्रावधान किया गया था। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इसके तहत इस साल पांच छात्रों को लाभांवित किया गया है
100 एकड़ जमीन चाहिए
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि एसईजेड के लिए 100 एकड़ जमीन चाहिए और पांच यूनिवर्सिटी को मिलकर इसको शुरू करना है। इसके लिए कम से कम एक राज्य विश्वविद्यालय को तैयार किया जा रहा है। बाकी निजी विश्वविद्यालयों को इसमें शामिल करेंगे। यह अच्छी योजना है, जल्द ही इसकी शुरुआत की जाएगी।
