February 18, 2026

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ऑपरेशन सिंदूर से चर्चाओं में आई एंटी ड्रोन गन ‘द्रोणम’ का निर्माण अब झांसी में, यह है खासियत

 उत्तर प्रदेश में रक्षा क्षेत्र की मजबूती और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम दर्शाती है। एंटी-ड्रोन गन ‘द्रोणम’ (Dronaam), जो ‘ब्लैक गन’ के नाम से भी जानी जाती है, अब झांसी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में बड़े पैमाने पर बनाई जाएगी। यह प्रणाली गुरुतवा सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (Gurutvaa Systems Pvt Ltd) द्वारा विकसित की गई है, जो एक भारतीय कंपनी है।

मुख्य खासियतें और क्षमताएं

  • रेंज: 1 से 8 किलोमीटर तक दुश्मन ड्रोनों को डिटेक्ट और न्यूट्रलाइज कर सकती है।
  • काम करने का तरीका: यह सॉफ्ट किल तकनीक पर आधारित है, यानी ड्रोन के कम्युनिकेशन, GPS, कंट्रोल सिग्नल को जाम (jam) कर देती है। इससे ड्रोन नियंत्रण खोकर गिर जाता है, बिना किसी विस्फोटक के इस्तेमाल के।
  • उपयोग के तरीके:
    • राइफल की तरह हाथ में पकड़कर (handheld)।
    • बैकपैक मोड में पीठ पर लादकर फील्ड ऑपरेशंस में।
    • वाहन या स्थायी जगह पर माउंट करके 360 डिग्री निगरानी।
  • तैनाती: सीमा सुरक्षा (जैसे पंजाब बॉर्डर पर BSF द्वारा), आंतरिक सुरक्षा, महत्वपूर्ण इंस्टॉलेशंस (जैसे G20 समिट, संसद आदि) की रक्षा में।
  • प्रभाव: पंजाब सीमा पर ड्रोन घुसपैठ रोकने की सफलता दर 3% से बढ़कर 55% हो गई है। 2024 में इससे 260+ ड्रोन नष्ट/निष्क्रिय किए गए, जिनमें हथियार, गोला-बारूद और ड्रग्स लाने वाले शामिल थे।

सम्मान और प्रदर्शन

  • ऑपरेशन सिंदूर (2025 में LoC पर पाकिस्तानी ड्रोनों के खिलाफ भारतीय सेना की कार्रवाई) में इसकी प्रभावशीलता साबित हुई, जिसके लिए कंपनी को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड से सम्मानित किया गया।
  • गणतंत्र दिवस परेड (26 जनवरी, संभवतः 2026 या हालिया) में भी प्रदर्शित की गई।
  • भारतीय सेना, वायुसेना, BSF, CRPF, असम राइफल्स आदि द्वारा पहले से इस्तेमाल हो रही है।

झांसी में उत्पादन की डिटेल्स

  • कंपनी: गुरुतवा सिस्टम्स को झांसी नोड में 10 हेक्टेयर जमीन आवंटित।
  • निवेश: पहले चरण में 150 करोड़ रुपये
  • रोजगार: लगभग 380 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार।
  • इससे यूपी डिफेंस कॉरिडोर मजबूत होगा, जो पहले से मेरठ, आगरा, कानपुर आदि में फैल रहा है।

यह कदम भारत को ड्रोन युद्ध में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देगा। ‘द्रोणम’ जैसी स्वदेशी तकनीकें अब सीमा पर ‘आयरन वॉल’ की तरह काम कर रही हैं, जो दुश्मन की ड्रोन घुसपैठ को बेअसर करती हैं।