
किशोरों और युवाओं में बर्दाश्त करने की क्षमता कम हो रही है। जरा सी बात पर वे अवसाद में आ जाते हैं। आवेगी निर्णय पर भी नियंत्रण नहीं रख पाते और घातक कदम उठा लेते हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के बाल एवं किशोरावस्था क्लीनिक में ऐसे मामले लगातार आ रहे हैं। मनोरोगियों के हिस्ट्री से पता चला है कि इसके लिए दुलार भरी पैरेंटिंग भी जिम्मेदार है।
डेढ़ साल में ओपीडी में 250 रोगी आए
किसी एक बात के इनकार पर उनमें क्रोध भर जाता है। इस क्रोध से बर्दाश्त की क्षमता कम हो गई है। इसके अलावा स्क्रीन इसे और बढ़ा रहा है। गेमिंग में मारधाड़ देखते हैं। यह भी उनमें आवेगी प्रवृत्ति बढ़ाने लगता है। ऐसे बच्चों की फ्रेंड सर्किल विस्तृत नहीं होती। अब उन्हें दादा-नानी की दंत कथाएं कोई नहीं सुनाता। साइकेट्रिस्ट डॉ. कृतिका चावला ने बताया कि डेढ़ साल में ओपीडी में 250 रोगी आए हैं। इनका आयु वर्ग पांच साल से 17 वर्ष रहा है।
ये भी हैं कारण