
पूंजी की आंधी में पत्रकारिता का सच विषय पर आयोजित सत्र में मीडिया की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और कॉर्पोरेट प्रभाव जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। पत्रकार शरत प्रधान, जूही सिंह, कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत और सिद्धार्थ कलहंस शामिली रहे। शरत प्रधान ने कहा कि आजकल पत्रकारिता और पत्रकार दोनों एक दबाव हैं।
विशेष व्याख्यान “हिमालय की चिंता पूरे देश की चिंता है” में प्रो. शेखर पाठक ने चेताया कि पर्यावरण की अनदेखी का प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा। “ये देश किसका है? या फिर सबका है?” नामक सत्र में वक्ताओं ने संविधान की भावना और बहुलतावादी समाज की आवश्यकता पर बल दिया। अंतिम सत्र में खुला संवाद हुआ जिसमें आम नागरिकों ने भी अपनी बात रखी।
लेखक सुभाष कुशवाहा ने कहा कि इस देश के मूलवासी आदिवासी हैं। परंतु जब प्रश्न आएगा कि देश किसका होता है, तो ध्यान रखना चाहिए कि जो लोग इस देश को बनाने में कुर्बानी देते हैं, ये देश उनका होता है। लेखक प्रो. नदीम हसनैन और पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. मसूद ने कहा कि सबको साथ लेकर चलने से ही देश आगे बढ़ेगा। वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह, पूर्व एमएलसी शशांक यादव, दिनेश कुमार सिंह, सुनील वर्मा आदि मौजूद रहे।

More Stories
गोंडा में पुरानी रंजिश को लेकर युवक पर फायरिंग, गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज रेफर, मामला दर्ज
अखिलेश यादव की गिरफ्तारी के विरोध में गौरा में समाजवादी पार्टी का जोरदार प्रदर्शन
पीलीभीत: मुकदमा दर्ज होने पर प्रधान ने जहर खाया, अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत