February 22, 2026

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गुप्तकालीन मंदिरों में स्थापत्य के विकसित रूप का मिला प्रमाण

Evidence of developed architectural forms found in Gupta period temples
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य संग्रहालय की ओर से आयोजित अभिरुचि पाठ्यक्रम के अंतर्गत तीसरे दिन शुक्रवार को ‘गुप्तकालीन कला में सांस्कृतिक चेतना’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. शैलेंद्र नाथ कपूर ने कहा कि संस्कृति से निर्मलता का निर्माण होता है और गुप्तकालीन कला इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। गुप्त काल के मंदिरों में गर्भगृह, मंडप, प्रदक्षिणा पथ और बरामदे का स्पष्ट प्रमाण मिलता है, जो उस समय की विकसित स्थापत्य परंपरा को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि चौथी से छठी शताब्दी का काल कला का स्वर्ण युग माना जाता है, जिसे गुप्तकाल के नाम से जाना जाता है। गुप्तकालीन मंदिरों की मूर्तियां, सिक्के और आभूषण अपनी विशिष्ट पहचान रखते थे।

प्रो. कपूर ने गुप्त संवत को ईसवी सन् में परिवर्तित करने के संदर्भ में अल्बरूनी की पुस्तक का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके अनुसार शक संवत के 241 वर्ष बाद गुप्त संवत का आरंभ हुआ। इस अवसर पर पद्मविभूषण से सम्मानित विद्या दहेजिया ने भी गुप्तकालीन इतिहास और कला पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सहायक निदेशक डॉ. मीनाक्षी खेमका, शारदा प्रसाद, प्रीति साहनी, डॉ. अनीता चौरसिया सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।