गोरखपुर
शहर की यातायात व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले राजघाट पुल में दरारें आ गई हैं और इसकी बेयरिंग भी खराब हो चुकी हैं। राप्ती नदी पर 1965 में बने इस सबसे पुराने और व्यस्त पुल से बड़ी गाड़ियां गुजरते समय झटके महसूस हो रहे हैं। करीब 20 साल बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने पुल की बड़े स्तर पर मरम्मत की योजना बनाई है। फरवरी में बेयरिंग बदलने का काम शुरू होगा, जिसके लिए कुछ दिनों तक पुल पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा। इस दौरान गाड़ियां एक ही पुराने पुल से आएंगी-जाएंगी।
निरीक्षण में कई जगहों पर कंक्रीट टूटने से सरिया बाहर निकल आई है। जॉइंट पर लगी बेयरिंग भी जर्जर हो चुकी हैं। पुल की संरचनात्मक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पीडब्ल्यूडी ने मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के विशेषज्ञों से जांच कराई और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।
रिपोर्ट के आधार पर फिलहाल दरारों को विशेष केमिकल से भरने का काम चल रहा है। लखनऊ से अनुभवी कारीगर बुलाए गए हैं, जो कमजोर कंक्रीट हटाकर नई तकनीक से मजबूती दे रहे हैं। इसके बाद बेयरिंग बदलने की संवेदनशील प्रक्रिया शुरू होगी।
अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार ने बताया कि बेयरिंग बदलते समय पुल पर ट्रैफिक पूरी तरह रोकना जरूरी होगा। खिचड़ी मेले और कोहरे को देखते हुए फरवरी में काम शुरू करने की योजना है। कितने दिनों तक बंद रहेगा, इसके लिए ट्रैफिक प्लान तैयार किया जा रहा है ताकि जनता को न्यूनतम असुविधा हो।
एमएमएमयूटी विशेषज्ञों की निगरानी में सभी खराब बेयरिंग और जॉइंट बदले जाएंगे। इसके बाद लोड टेस्टिंग होगी ताकि पुल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। अप्रैल-मई तक मरम्मत पूरी हो जाएगी। इससे पुल की उम्र और मजबूती दोनों बढ़ेगी।
नोट: लंबे समय से शहर के यातायात को संभाल रहे इस पुल की सुरक्षा के लिए यह मरम्मत आवश्यक है। विभाग जन सुविधा का पूरा ध्यान रख रहा है।

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