
करीब घंटो की मशक्त के बाद स्कूल के शौचालय में तेंदुए के मिलने के बाद दीवार में छेद कर तेंदुए पर ट्रेंकुलाईजर गन से शॉट देने की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान जी ब्लॉक में डीजे की धमक और ढोल की थाप से तेंदुआ बैचेन हो गया। बाथरूम में उसने शौचालय की शीट पर हमला कर तोड़ डाली। शोर के कारण तेंदुआ एक जगह स्थिर नहीं हो पा रहा था। ऐसे में उस पर निशाना लगाना चुनौती रहा। एसआई कमलेश सिंह ने टीम को बताया कि बराबर में बज रहे डीजे और ढोल को तुंरत बंद कराया जाए ताकि तेंदुआ कुछ शांत हो सके। ऐसे में टीम मौके पर पहुंची और डीजे और दूसरे स्थान पर बज रहे ढोल को बंद कराया। साथ ही चेतावनी दी कि रेस्क्यू पूरा होने तक कोई शोर नहीं होगा। इसके साथ करण सिंह के मकान में मरम्मतीकरण का कार्य भी टीम ने बंद कराया। हालांकि इसके काफी देर बाद तक तेंदुआ बैचेन रहा और ट्रैंकुलाईजर गन से पहला शॉट नाकाम रहा।
तेंदुआ की आवक घर तक होने की सूचना सोशल मीडिया पर तेजी से फैली । आसपास के लोगों ने वाइल्डलाइफ और वन विभाग की टीम को सुरक्षात्मक संशाधनों से लैस देखा तो दहशत व्याप्त हो गई। अधिकांश अभिभावक अपने-अपने कार्यालयों, दुकानों और प्रतिष्ठानों से घरों पर पहुंचे। स्कूल गए बच्चों को अपने वाहन से घर लाए और उन्हें घरों में रहने की हिदायत दी। टीम ने स्कूली बच्चों की वैन, रिक्शा और ई-रिक्शा और ऑटो को जी ब्लॉक की गली में नहीं जाने दिया। उनके अभिभावक पुलिस संरक्षण में अपने-अपने बच्चों को घर तक ले गए।
एक ओर तेंदुआ की दहशहत थी तो दूसरी ओर युवाओं में उसे देखने की ललक भी थी। वन विभाग की टीम रेस्क्यू कैसे करती है इसके लिए स्थानीय लोग अपने-अपने घरों की छतों पर लाठी-डंडे लेकर मौजूद रहे तो कुछ युवाओं ने पेडों को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया। नौ घंटों तक चले रेस्क्यू के दौरान मौके पर हजारों लोगों को हुजूम लगा रहा।
प्रबंधन ने स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर बुधवार की सुबह सात बजे ही अवकाश घोषित कर दिया था। आसपास के तीन-चार स्कूलों ने भी आपातकालीन स्थिति बताकर अवकाश घोषित कर दिया। हालांकि कुछ बच्चों के अभिभावकों ने मैसेज नहीं देखा। ऐसे में करीब दो दर्जन से अधिक बच्चे करीब आठ बजे स्कूल के गेट पर पहुंचे लेकिन करीब डेढ सौ पुलिसकर्मी, वन्य टीम और अधिकारियों को देखकर वह भी घरों को लौट गए।
