कानपुर, 25 दिसंबर 2025:
कानपुर के गंगा बैराज पर मंगलवार शाम हुई सनसनीखेज घटना में तेज रफ्तार काले रंग की हुंडई औरा कार ने पुलिस बैरियर तोड़ दिया और चेकिंग कर रहे तीन पुलिसकर्मियों को टक्कर मारकर फरार हो गई। घायल पुलिसकर्मियों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन आरोपियों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस का कहना है कि घटना की सूचना वायरलेस पर तुरंत दी जाती तो शायद आरोपी पकड़े जा सकते थे, लेकिन व्हाट्सएप मैसेज भेजने में देरी हो गई।
घटना का विवरण मंगलवार शाम करीब 6:30 बजे अटल घाट चौकी इंचार्ज संजय, एसआई पूरन सिंह और होमगार्ड हरि प्रकाश गंगा बैराज पर नाका लगाकर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान बिठूर की ओर से आ रही तेज रफ्तार हुंडई औरा कार ने बैरियर को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बैरियर टूट गया और तीनों पुलिसकर्मी कार की चपेट में आकर घायल हो गए। कार चालक ने रुकने की बजाय गाड़ी भगाकर बिठूर की ओर भाग निकला।
मौके पर पहुंचे कोहना थानाध्यक्ष प्रतीक सिंह और ट्रैफिक पुलिस स्टाफ ने घायलों को उठाकर हैलट अस्पताल पहुंचाया।
व्हाट्सएप की चूक बनी भागने का मौका पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद वायरलेस सेट पर सूचना प्रसारित करने की बजाय अधिकारियों को व्हाट्सएप मैसेज भेजा गया, जिसमें करीब आधे घंटे की देरी हो गई। इस देरी के कारण आरोपी आसानी से फरार हो गए। अगर वायरलेस पर तत्काल अलर्ट जारी होता तो आसपास की चौकियां सतर्क हो जातीं और कार को रोक लिया जाता।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) आशुतोष कुमार ने कहा, “घायल पुलिसकर्मियों को अस्पताल पहुंचाना प्राथमिकता थी, लेकिन वायरलेस से सूचना दी जा सकती थी। आरोपी की तलाश जारी है, डीसीपी सेंट्रल की टीम लगी हुई है।”
सीसीटीवी में दिखे चेहरे, लेकिन नंबर प्लेट गायब पुलिस ने उन्नाव से बिठूर तक कई सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं। इनमें कार चालक और अगली सीट पर बैठे व्यक्ति के चेहरे साफ नजर आ रहे हैं, लेकिन नंबर प्लेट धुंधली या छिपी हुई है, जिससे वाहन का पता नहीं चल सका। कोहना थाने की गंगा बैराज चौकी इंचार्ज प्रभाशंकर सिंह ने अज्ञात कार सवारों के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने, तेज गति और दूसरों की जान जोखिम में डालने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।
पुलिस अब सीसीटीवी में दिखे चेहरों की पहचान और अन्य तकनीकी सुरागों के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है। घटना से पुलिस महकमे में भी सवाल उठ रहे हैं कि आधुनिक संचार साधनों के बावजूद पुराने वायरलेस सिस्टम की अनदेखी क्यों की गई।
घायल पुलिसकर्मी खतरे से बाहर हैं और उनका इलाज चल रहा है।

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