लखनऊ राजधानी में सरकारी नौकरी के लिए फर्जी मार्कशीट बनाने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 923 फर्जी मार्कशीटें और बनाने का सामान बरामद हुआ। पूछताछ में 25 विश्वविद्यालयों के नाम सामने आए, जिनमें उत्तराखंड का हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (पहले हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता था) भी शामिल है। यह दूसरी बार है जब इस विश्वविद्यालय का नाम फर्जीवाड़े में उजागर हुआ है।
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी गोमतीनगर थाना पुलिस और पूर्वी जोन की क्राइम टीम ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए अयोध्या के पूरा कलंदर निवासी सत्येंद्र द्विवेदी (मास्टरमाइंड), उन्नाव के बीघापुर निवासी अखिलेश कुमार और लखीमपुर खीरी के ईशानगर निवासी सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने कबूल किया कि 2021 से अब तक उन्होंने करीब 1500 छात्रों को फर्जी मार्कशीट और डिग्री बेचीं। इन फर्जी दस्तावेजों से कई लोग सरकारी और प्राइवेट नौकरियों में घुसपैठ कर चुके होंगे।
विश्वविद्यालय का नाम फिर सुर्खियों में एक अभ्यर्थी ने सरकारी स्कूल में नौकरी के लिए हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की मार्कशीट लगाई थी, जो जांच में फर्जी निकली। इससे पहले 2024 में मेरठ के लावड़ा स्थित राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता पद के लिए एक युवक ने इसी विश्वविद्यालय की मार्कशीट जमा की थी। संदेह पर कॉलेज प्रधानाचार्य ने सत्यापन कराया तो मार्कशीट फर्जी पाई गई।
आरटीआई का जवाब नहीं दिया विवि ने प्रधानाचार्य ने आरटीआई के माध्यम से विश्वविद्यालय से जानकारी मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तत्कालीन राज्य सूचना आयुक्त ने स्वयं सत्यापन किया तो छात्र का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। विश्वविद्यालय ने ऐसी मार्कशीट जारी करने से इनकार किया और स्पष्टीकरण मांगा गया था। पुलिस का मानना है कि मेरठ वाला आवेदक भी इन 1500 फर्जी लाभार्थियों में से एक हो सकता है।
पुलिस जांच जारी है और गिरोह के तीन अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। उनके पकड़े जाने के बाद कई और राज खुल सकते हैं। यह मामला शिक्षा व्यवस्था में फर्जीवाड़े की गंभीर समस्या को उजागर करता है।

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