January 19, 2026

TNC Live TV

No.1 News Channel Of UP

बिन बिजली चलने लगी आटा चक्कीजिन खेतों में उड़ती थी धूल, वहां लहलहा रही सब्जी की फसलें

बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा की क्रांति सच में कमाल की है!  की इस खबर से साफ पता चलता है कि कैसे सोलर पंप और सौर ऊर्जा ने किसानों का जीवन बदल दिया है। जहां पहले बिजली की कमी से खेत सूखे रहते थे और धूल उड़ती थी, वहीं अब सब्जियों की हरी-भरी फसलें लहलहा रही हैं।

खेतों में सब्जियां और अतिरिक्त कमाई

चित्रकूट के बदरपुर गांव के राम विशाल यादव जैसे किसानों ने पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप लगवाया। पहले सिर्फ अरहर-जौ की फसल होती थी और खेत ज्यादातर खाली रहते थे। अब पूरी तरह सब्जी की खेती हो रही है। सालाना डेढ़ से दो लाख रुपये की कमाई हो रही है, और दूसरों के खेतों की सिंचाई से अतिरिक्त 50 हजार की आय। आसपास के गांवों में भी दर्जनों किसानों ने सोलर पंप लगवा लिए, और पूरा इलाका अब सब्जी उत्पादन का हब बन गया है।

यहां सोलर पंप से सिंचित हरी-भरी सब्जियों के खेतों की कुछ झलकियां देखिए:

आटा चक्की और लघु उद्योग बिना बिजली के चल रहे

झांसी-जालौन इलाके में संजय सिंह ने 18 किलोवाट का सोलर प्लांट लगवाया (लगभग 7 लाख का खर्च)। पहले डीजल से रोज 500 रुपये का खर्च होता था, अब सोलर से आटा चक्की, स्पेलर और पानी का पंप सब चलता है। रोजाना दो हजार रुपये की बचत, और गांव के तीन युवाओं को रोजगार भी मिला।

सोलर से चलने वाली आटा चक्की (अट्टा चक्की) की तस्वीरें:

रोजगार के नए अवसर और हाईवे पर सोलर

बांदा, महोबा, झांसी जैसे इलाकों में सोलर पैनल की दुकानें और मरम्मत सर्विस बढ़ गई हैं। अमित सिंह जैसे युवा गुड़गांव से लौटकर दुकान खोल रहे हैं, और दिनेश लोधी जैसे लोग टेक्नीशियन बनकर रोज 500-1000 रुपये कमा रहे हैं। हाईवे के ढाबों-होटलों पर भी सोलर पैनल लगे हैं, जहां बिजली बिल में 35% तक की बचत हो रही है।

ढाबों/होटलों की छत पर लगे सोलर पैनल्स की कुछ उदाहरण तस्वीरें:

सोलर पंप से सिंचाई का नजारा

यहां एक सोलर पंप से खेत में पानी की सिंचाई का रियल उदाहरण:

सरकारी आंकड़े और योजना का असर

उत्तर प्रदेश में पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंपों पर 60% अनुदान मिलता है। बुंदेलखंड में पहले से ही काफी इंस्टॉलेशन हो चुके हैं, और 2025-26 में कुल 40,521 सोलर पंप लगाने का लक्ष्य है (जिसमें 30%+ बुंदेलखंड में)। इससे सालाना हजारों लीटर डीजल बच रहा है, कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है, और ऊर्जा की बचत हो रही है। राज्य स्तर पर सोलर को बढ़ावा देने के लिए बड़े टारगेट हैं, जैसे बुंदेलखंड को सोलर हब बनाना।

यह बदलाव न सिर्फ किसानों की लागत घटा रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा पहुंचा रहा है और युवाओं के लिए लोकल रोजगार पैदा कर रहा है। बुंदेलखंड अब सोलर ऊर्जा की नई मिसाल बन चुका है!

अगर आप भी इस योजना के बारे में ज्यादा जानना चाहें या आवेदन कैसे करें, तो बताएं।