
सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि तीन मार्च की रात करीब 11 बजे दमकल विभाग को आग लगने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर आग दूसरे तल की सीढ़ियों तक पहुंच चुकी थी। पार्किंग में खड़े करीब 40 वाहन जलने लगे थे। दमकल की 10 गाड़ियों और करीब 50 कर्मचारियों की मदद से आग बुझाने व इमारत में फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया गया।
दमकल की सीढ़ियों का प्रयोग कर लोगों को बाहर निकाला गया। इस दौरान पहली मंजिल के एक फ्लैट में राजेंद्र प्रसाद (48) और उनकी पत्नी मीनू प्रसाद (45) बेहोशी की हालत में मिले। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अन्य फ्लैटों में फंसे लोगों को भी निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकांश लोग धुएं से प्रभावित हुए थे। सभी की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।
निकलने का रास्ता नहीं मिला, बालकनी में आकर मदद के लिए चिल्लाए : जानकारी के अनुसार, यह इमारत दिल्ली से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 2019 में नोएडा के एक बिल्डर ने कराया था। इमारत में 43 परिवार रह रहे हैं। रात करीब 11 बजे आग लगने के समय कई परिवार सो चुके थे।
बताया गया कि इमारत से बाहर निकलने का एक रास्ता बंद रहता है। दूसरे पर आग फैल चुकी थी। ऐसे में लोग जान बचाने के लिए ऊपर की ओर भागे। कई लोग बालकनी में आकर मदद के लिए चिल्लाने लगे। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दमकल और राहत टीम ने पूरी इमारत खाली कराई।
दमकल की तत्परता से बची 40 की जानः खोड़ा की जिस इमारत में आग लगी थी, वहां के 10 परिवारों को बचाने के लिए दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इन परिवारों के फ्लैट अंदर से बंद थे और लोग बेहोश होकर जहां-तहां पड़े हुए थे। दमकलकर्मियाें ने हथौड़ों व अन्य उपकरणों से दरवाजे तोड़े।
इसके बाद करीब 40 बेसुध लोगों को कंधों पर लादकर बाहर निकाला। थाेड़ा और समय लगता तो इन लोगों की जान बचाना मुश्किल हो सकता था। सीएफओ ने बताया कि आग पार्किंग एरिया और सीढि़यों पर लगी थी। धुंआ पांचवीं मंजिल तक पहुंच गया था। इससे बचाव कार्य में लगातार परेशानियां आ रही थीं।

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