कानपुर के हैलट अस्पताल (LLR Hospital, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध) में एक गंभीर अनियमितता का मामला है।
मुख्य घटना का सारांश
- प्राचार्य डॉ. संजय काला ने शनिवार (17 जनवरी 2026) को ओपीडी का औचक निरीक्षण किया।
- मेडिसिन ओपीडी में दो मरीजों (साधना और दीपक) को डॉ. ब्रजेश कुमार ने अस्पताल में उपलब्ध जांचों के बजाय निजी पैथोलॉजी लैब में जांच कराने के लिए कहा।
- पर्चे पर जांच का नाम नहीं लिखा गया, बल्कि एक मोबाइल नंबर दिया गया और कहा गया कि वहां जाकर पैथोलॉजी वाले से बात करा देना।
- डॉक्टर ने मरीजों को डांटा कि “बहस मत करो, जाओ जांच कराओ” और दावा किया कि हैलट में जांच में 24 घंटे लगते हैं, जबकि बाहर आधे घंटे में रिपोर्ट मिल जाएगी।
- प्राचार्य ने मरीजों से बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई और मामले को पकड़ा।
- बाद में मरीजों की जांच अस्पताल में ही कराई गई और दवाएं भी दी गईं।
डॉक्टर का पक्ष
डॉ. ब्रजेश कुमार (जो मूल रूप से आजमगढ़ में तैनात हैं और यहां अटैचमेंट पर हैं) ने सफाई दी कि उन्होंने मरीज को 34 नंबर कमरे (संभवतः अस्पताल की पैथोलॉजी) में भेजा था, लेकिन मरीज भटक गए। उन्होंने अपना नंबर इसलिए लिखा ताकि बात करा सकें। उन्होंने इसे गलतफहमी बताया।
प्राचार्य की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
- डॉ. संजय काला ने कहा कि यह कमीशन के चक्कर में किया गया आपराधिक कृत्य है।
- डॉ. ब्रजेश की पहले भी ऐसी गड़बड़ियां पकड़ी जा चुकी हैं (जिसमें अटैचमेंट खत्म करने के लिए पत्र लिखा गया था)।
- उनकी यूनिट में पहले “जिंदा मरीज को मुर्दा घोषित” करने जैसी घटना भी हुई थी।
- अब फिर अटैचमेंट खत्म करने के लिए पत्र भेजा जाएगा।
- शासन को कड़ी विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
पृष्ठभूमि में अन्य घटनाएं
हैलट अस्पताल में निजी पैथोलॉजी/दलालों से जुड़े मामले पहले भी सामने आए हैं:
- पैथोलॉजी एजेंटों द्वारा फर्जी रिपोर्ट देना।
- दलालों को पकड़ना, निजी लैब के कार्ड मिलना।
- महंगी दवाओं का काला कारोबार।
यह मामला सरकारी अस्पतालों में मरीजों का शोषण, कमीशनबाजी और सुविधाओं के बावजूद प्राइवेट रेफरल की समस्या को उजागर करता है। X (ट्विटर) पर भी यह खबर वायरल हुई है, जहां यूजर्स ने डॉक्टर ब्रजेश कुमार और अस्पताल की लापरवाही पर चर्चा की है।
यदि आपको इस मामले की कोई अतिरिक्त डिटेल, अपडेट या संबंधित अन्य खबर चाहिए, तो बताएं!

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