को मौनी अमावस्या मनाई गई, जो माघ मास की अमावस्या है। यह दिन हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर पितरों की शांति, आत्मशुद्धि और पुण्य कमाने के लिए।
आपके द्वारा शेयर की गई खबर बिल्कुल सटीक है—गोरखपुर में राप्ती नदी के राम घाट और गुरु गोरक्षनाथ घाट पर ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 बजे से) श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। लाखों की संख्या में लोग परिवार सहित आए, मौन रहकर स्नान किया, पूर्वजों को तर्पण दिया, गौ दान किया और दान-पुण्य किए। घाट पर मेले जैसा माहौल था, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में खास उत्साह दिखा। यह नजारा प्रयागराज के संगम जैसा ही भक्तिमय रहा होगा!
मौनी अमावस्या का महत्व
- इस दिन मौन (चुप्पी) रखने की परंपरा है, इसलिए इसे मौनी या गूंगी अमावस्या भी कहते हैं। मौन से मन की शांति और आध्यात्मिक एकाग्रता बढ़ती है।
- पितरों को तर्पण करने से पितृ दोष दूर होता है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
- पवित्र नदियों (जैसे गंगा, राप्ती, सरयू) में स्नान का विशेष फल मिलता है—मान्यता है कि इस दिन नदी का जल अमृत समान हो जाता है।
- दान (अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, कंबल, धन आदि) का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
- रविवार को पड़ने से महत्व और बढ़ गया, साथ ही कई शुभ योग (जैसे सर्वार्थ सिद्धि योग) बने थे।
मुख्य अनुष्ठान
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान।
- मौन व्रत रखना (बिना बोले दिन बिताना)।
- सूर्य को अर्घ्य देना, विष्णु पूजा, गंगा स्तोत्र या विष्णु चालीसा पढ़ना।
- तिल-गुड़ के लड्डू या अन्य दान।
- शाम को दीपक जलाना और पितरों की आरती।
यह पर्व आत्मिक शुद्धि और पारिवारिक कल्याण का प्रतीक है। गोरखपुर जैसे शहरों में स्थानीय स्तर पर राप्ती तट पर इतनी भारी भीड़ उमड़ना भक्ति की जीवंतता दिखाता है। क्या आपने आज कोई विशेष अनुष्ठान किया, या इस खबर से जुड़ा कोई व्यक्तिगत अनुभव है?

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