लखनऊ में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जहां जालसाजों ने लोगों को बड़ी रकम का चूना लगाया। ये घटनाएं निवेश और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी हैं, जो साइबर अपराध की बढ़ती चुनौतियों को दर्शाती हैं।
57 लाख के शेयर बेचकर ठगी का मामला: लखनऊ के ठाकुरगंज क्षेत्र के अहमदगंज प्रेम विहार निवासी मोहम्मद इमरान खान (जो पिछले तीन साल से ग्रो ऐप के माध्यम से शेयर ट्रेडिंग कर रहे थे) को साइबर ठगों ने 57 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया।
14 जनवरी को उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ग्रो कंपनी का प्रतिनिधि ‘नितिन’ बताया और कहा कि उनके ट्रेडिंग खाते में तकनीकी समस्या है। अगर तुरंत सेटिंग नहीं की गई तो बड़ा नुकसान हो सकता है।
जालसाज की बातों में आकर इमरान ने खाता चेक किया तो पाया कि उनके सभी शेयर निकालकर बेच दिए गए हैं और राशि जालसाजों के खाते में ट्रांसफर हो गई। ठगी का शिकार होने के बाद 20 जनवरी को उन्होंने ठाकुरगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई।
इंस्पेक्टर ओमवीर सिंह ने बताया कि साइबर क्राइम सेल की मदद से जालसाजों का पता लगाया जा रहा है। यह मामला स्टॉक ट्रेडिंग ऐप्स पर फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग के खतरे को उजागर करता है।
क्रेडिट कार्ड से 90 हजार की ठगी: दूसरे मामले में सर्वोयदनगर निवासी शुभम यादव को 18 जनवरी को अनजान नंबर से कॉल आई। जालसाज ने बातों में उलझाकर उनके क्रेडिट कार्ड से 90 हजार रुपये का अनधिकृत ट्रांजेक्शन कर लिया।
ट्रांजेक्शन का मैसेज आने पर शुभम को ठगी का पता चला। उन्होंने 20 जनवरी को गाजीपुर थाने में केस दर्ज कराया। एसीपी गाजीपुर ए. विक्रम सिंह ने जांच की पुष्टि की और कहा कि मामले की छानबीन जारी है।
सुझाव: ऐसे मामलों में सतर्क रहें—
- कभी भी अनजान कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी, OTP या पासवर्ड न दें।
- कंपनी के प्रतिनिधि होने का दावा करने वालों से आधिकारिक नंबर पर संपर्क करें।
- ट्रेडिंग ऐप्स में दो-कारक प्रमाणीकरण (2FA) चालू रखें और नियमित रूप से खाता चेक करें।
पुलिस साइबर क्राइम सेल सक्रिय है, लेकिन जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

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