February 1, 2026

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मोबाइल ने जेन जी से छीनी कलम की पकड़, कॉपियों में शॉर्टकट का हो रहा इस्तेमाल

Mobile phones have taken away the pen from Gen Z, leading to shortcuts being used in notebooks

 डिजिटल दौर में मोबाइल जेन जी के लिए ज्ञान और संचार का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है लेकिन यह उनकी लेखन क्षमता और भाषा कौशल पर भी भारी पड़ता नजर आ रहा है। शॉर्टकट भाषा, सोशल मीडिया स्लैंग और अधूरे उत्तर इसका प्रमाण हैं। कॉपी-पेस्ट की संस्कृति में कैद होती जा रही जेन जी की भाषायी क्षमता अब शिक्षा जगत के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। महाविद्यालयों में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान यह सामने आया है कि विद्यार्थियों की कलम की पकड़ कमजोर हो रही है। वे सोशल मीडिया की शॉर्टकट भाषा व उधार के शब्दों के सहारे उत्तर लिख रहे हैं।

प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में इन दिनों मूल्यांकन का कार्य चल रहा है। हल्द्वानी के एमबीपीजी महाविद्यालय में अन्य कॉलेजों की कॉपियां जांची जाने के लिए पहुंची हैं। कुछ कॉपियों को पढ़ने के बाद तो प्रोफेसर भी अचंभित हैं। विद्यार्थी अजब-गजब तरीके से प्रश्नों के जवाब दे रहे हैं जिससे शिक्षकों को मूल्यांकन में दिक्कत आ रही है।

कुमाऊं विवि के अधीन एमबीपीजी कॉलेज के अध्यापक और मूल्यांकन कार्य कर रहे डॉ. नवल किशोर लोहनी का कहना है कि यह चिंता की बात है। विद्यार्थियों में लिखने की आदत कम हो गई है। भाषा में पकड़ कम हो रही है। यह तब है जब एनईपी 2020 के तहत सभी महाविद्यालयों में दो साल के भाषा कोर्स भी चल रहे हैं।

कॉपियों में इस तरह की दिक्कतें आ रही सामने

अंग्रेजों की हड़प नीति प्रश्न के जवाब में कई विद्यार्थियों ने हड़प्पा संस्कृति का पूरा वर्णन कर दिया।

अंग्रेजी और इतिहास के प्रश्नपत्र में कई प्रश्नों का जवाब रोमन/हिंग्लिश भाषा में दिया गया। मसलन आक्रमण को Attack लिखने की जगह Akraman लिख रहे है।

हिंदी के प्रश्नपत्र में उत्तर पुस्तिका भरने के लिए कई विद्यार्थी पद्य से जुड़े सवालों के जवाब के बीच में फिल्मी गाने लिख रहे हैं।

जिस प्रश्न का जवाब अच्छे से आता था उसका उत्तर देने के साथ ही वह उसी प्रश्न-उत्तर को पीछे के पन्नों पर भी दोहरा रहे हैं। इससे कई बार निरीक्षक भ्रमित हो रहे हैं।

उत्तर पुस्तिका में प्रश्नपत्र के सेक्शन या प्रश्नों के क्रम से जवाब नहीं लिखना भी आम है।

अधिकतर उत्तर पुस्तिकाओं में And की जगह & का उपयोग हो रहा है।

मनोवैज्ञानिक डॉ. युवराज पंत कहते हैं….

युवा पीढ़ी में लिखने और पढ़ने की आदत खत्म होती जा रही है। इसके कारण उनकी भाषा भी ठीक नहीं है। उन्हें मात्राओं का भी ज्ञान नहीं हो रहा है।

हमारा दिमाग एक चाकू की तरह है, जितना चलाओगे उतना काम करेगा लेकिन युवा पीढ़ी मोबाइल और कंप्यूटर की इतनी आदी हो चुकी है कि शॉर्टकट को अपना रही है। वह दिमाग को जिस तरह निर्देशन दे रही है दिमाग भी उसी तरह चल रहा है।

विद्यार्थियों को केवल परीक्षा पास करनी है इसलिए वह उतना ही लिख रहे हैं। लिखने की स्पीड कम होगी तो वह पूरा उत्तर नहीं लिख पाएगा। यही कारण है 300 शब्दों में अगर सवाल का जवाब देना है तो वह 100 से 150 शब्द ही लिख पाता है। 

एमबीपीजी कॉलेज में यूजी-पीजी की काॅपियों का मूल्यांकन आठ जनवरी से शुरू हो गया था। यहां अन्य कॉलेजों की कापियां मूल्यांकन के लिए पहुंची हैं। अभी तक 70 प्रतिशत काम निपट चुका है। सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक करीब 30 प्रोफेसरों की डयूटी लगी है। अधिकतर परीक्षार्थियों की 24 पन्ने की कॉपियों में 10 से 12 पन्ने खाली जा रहे हैं। – डॉ. सुरेश चंद्र टम्टा, मूल्यांकन प्रभारी, एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी