
जिले में पतंगबाजी का मुख्य उत्सव बीत जाने के बावजूद प्रतिबंधित चीनी मांझे का खौफ कम नहीं हो रहा है। बृहस्पतिवार को पड़ाव से राजघाट को जोड़ने वाले मालवीय पुल पर एक स्वास्थ्यकर्मी मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। मांझे से उनकी भौंह, आंखों की दोनों पलकों और नाक के ऊपरी हिस्से को बुरी तरह कट गया। समय रहते उपचार मिलने से उनकी जान बचाई जा सकी। उन्हें 16 टांके लगाने पड़े।
बच गई आंखें
लौटते समय जैसे ही वह मालवीय पुल पर पहुंचे, अचानक लटकते हुए चीनी मांझे ने उनके चेहरे को अपनी गिरफ्त में ले लिया। गंभीर चोट के कारण तत्काल भारी रक्तस्राव शुरू हो गया। उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए मफलर से घाव को बांधा और प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचे।
घायल महेंद्र पाल पहले पड़ाव स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि वहां इलाज के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई और उनसे 1800 रुपये वसूल लिए गए। स्थिति बिगड़ती देख वह तुरंत रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल पहुंचे। वहां उनका उपचार शुरू हुआ।
डॉक्टरों को उनके चेहरे और आंखों के ऊपरी हिस्से पर कुल 16 टांके लगाने पड़े। शास्त्री अस्पताल के सीएमएस डॉ. गिरीश द्विवेदी ने बताया कि जब मरीज अस्पताल आया, तब उनकी स्थिति काफी चिंताजनक थी। मांझे ने आंखों के बेहद करीब और नाक के ऊपरी हिस्से पर गहरा कट लगाया था।
दो दिनों में 30 से अधिक हुए थे घायल
इससे पहले 14 और 15 जनवरी को दो दिनों में चीनी मांझे से 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। 15 जनवरी को मांझे से घायल हरहुआ के रहने वाले 6 वर्षीय बच्चे पार्थ सिंह के चेहरे पर 10 टांके लगे थे। रामनगर पड़ाव पर रामअवतार चौहान नाम के युवक का मांझे से गला कट गया था। इसी प्रकार कज्जाकपुरा, सोनारपुरा, लंका समेत जिले के कई क्षेत्रों में घायल लोगों का अस्पताल में इलाज हुआ।
500 क्विंटल से अधिक मांझा बरामद, 10 गिरफ्तार
चीनी मांझे के खिलाफ पुलिस ने अभियान चलाकर 500 क्विंटल से अधिक मांझा बरामद किया था। वहीं अलग-अलग क्षेत्रों से 10 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। बावजूद इसके चीनी मांझे की खूब बिक्री हुई। हादसों को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इसे लेकर आदेश जारी किया है कि चीनी मांझे से घायल होने के बाद होने वाली मौत में हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए।
