बस्ती (उत्तर प्रदेश)
बस्ती जिले के परशुरामपुर थाने में तैनात सीनियर सब-इंस्पेक्टर (एसएसआई) अजय गौड़ की रहस्यमयी मौत ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। 5 फरवरी से लापता चल रहे दरोगा का शव 8 फरवरी 2026 को अयोध्या जिले में सरयू नदी (घाघरा) से बरामद हुआ। परिवार का आरोप है कि यह प्लांड मर्डर है, न कि सुसाइड या हादसा।
मृतक दरोगा के छोटे भाई, जो झांसी में एडीएम पद पर तैनात हैं, अरुण कुमार गौड़ ने पीएम हाउस (पुलिस मुख्यालय) में अधिकारियों के सामने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा:
- “भाई की मौत हो गई और सीओ कैसे बात करते रहे? पूरी घटना की रिकॉर्डिंग भी है।”
- “एसपी को फोन किया तो फोन नहीं उठाया? कप्तान साहब को नींद कैसे आ गई?”
- “डीआईजी साहब का ईगो है कि यहां अपने दरोगा को देखने नहीं आ सकते? डीआईजी आएं और अपने दरोगा का शक्ल तो देख लें।”
- “गाड़ी यहां (बस्ती में) और लाश वहां (अयोध्या में)… यह कैसे संभव है?”
- “पूरे थाने को सस्पेंड किया जाए, चार लोगों के खिलाफ धारा 302 (हत्या) का मुकदमा दर्ज हो।”
- “सीडीआर जांच हो, अंतिम कॉल किसका था? गुमशुदगी रिपोर्ट की जांच कौन कर रहा है?”
अरुण ने पीएम हाउस पर ही तहरीर देने की बात कही और अधिकारियों के समझाने पर वहीं बैठ गए। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
घटना का क्रम:
- 5 फरवरी 2026: अजय गौड़ ड्यूटी के लिए घर से निकले, लेकिन लौटे नहीं। पत्नी रंजिता से आखिरी बार 2-3 सेकंड बात हुई, फिर फोन बंद।
- 6 फरवरी: परिवार को लापता होने की जानकारी मिली। बाइक अमहट घाट (कुआनो नदी) के पास लावारिस मिली।
- 8 फरवरी शाम: अयोध्या कोतवाली क्षेत्र के तिघुरा माझा गांव के पास सरयू नदी में शव बरामद। मल्लाह ने सूचना दी।
- आखिरी सीसीटीवी फुटेज में दरोगा एक सफाईकर्मी के साथ बाइक पर जाते दिखे।
परिवार का शक:
पत्नी रंजिता गौड़ ने कहा कि अजय को पहले दुबौलिया थाने में एक नाबालिग की मौत के मामले में धमकियां मिली थीं। उन्होंने इसे साजिश बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। परिवार सीबीआई जांच चाहता है।
पुलिस का पक्ष:
डीआईजी संजीव त्यागी ने परिवार से मुलाकात कर आश्वासन दिया कि तहरीर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। पुलिस ने कहा कि पूरा महकमा पीड़ित परिवार के साथ है। पोस्टमार्टम चिकित्सकों के पैनल से कराया जा रहा है।
यह मामला पुलिस विभाग में असुरक्षा और संदिग्ध परिस्थितियों पर सवाल उठा रहा है। परिवार की मांग है कि नामजद आरोपियों के खिलाफ तुरंत केस दर्ज हो और जांच तेज की जाए।

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