नई दिल्ली
उन्नाव दुष्कर्म मामले से जुड़े पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के केस में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सोमवार (9 फरवरी 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत और सजा निलंबन की याचिका पर सीधे सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ (जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन.वी. अंजरिया शामिल थे) ने दिल्ली हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह सेंगर की अपील को आउट-ऑफ-टर्न (प्राथमिकता के आधार पर) सुनवाई करे और तीन महीने के भीतर इसका निपटारा कर दे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए वहां ही शीघ्र सुनवाई होनी चाहिए।
मुख्य बातें:
- कुलदीप सिंह सेंगर को इस मामले में निचली अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई थी।
- उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में सजा निलंबित करने और जमानत की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने जनवरी 2026 में इसे खारिज कर दिया था।
- इसके बाद सेंगर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन शीर्ष अदालत ने तत्काल राहत देने से मना कर दिया।
- सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सेंगर की अपील के साथ पीड़िता की सजा बढ़ाने वाली अपील और अन्य सह-आरोपियों की अपीलों को भी एक साथ सुना जाए।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट में अपील 11 फरवरी 2026 से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
मामले का बैकग्राउंड:
यह मामला 2017 के उन्नाव दुष्कर्म कांड से जुड़ा है, जहां पीड़िता (तब नाबालिग) पर आरोप लगे थे कि कुलदीप सिंह सेंगर ने उनके साथ बलात्कार किया। 2018 में पीड़िता के पिता को कोर्ट सुनवाई के दौरान हमला हुआ, बाद में उन्हें हिरासत में लिया गया और 9 अप्रैल 2018 को उनकी हिरासत में मौत हो गई। सेंगर को इस मौत के मामले में दोषी ठहराया गया और 10 साल की सजा हुई। ( बलात्कार मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा मिल चुकी है।)
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मामले को तेजी से निपटाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन सेंगर को फिलहाल जमानत नहीं मिली। दिल्ली हाईकोर्ट अब तीन महीने के अंदर फैसला सुना सकता है।

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