February 13, 2026

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भरपेट खाने के बाद भी कुपोषित हो रहे लोग, 80 फीसदी रोगियों को सप्लीमेंट की जरूरत, इनका रखें ध्यान

कानपुर के हैलट अस्पताल (LLR अस्पताल, GSVM मेडिकल कॉलेज से संबद्ध) से जुड़ी एक चिंताजनक स्वास्थ्य समस्या की है, जिसे “नई बीमारी” या हिडन हंगर (छिपा हुआ भूख) कहा जा रहा है।

मुख्य बातें और रिपोर्ट का सारांश:

  • समस्या: लोग भरपेट खाना खा रहे हैं, लेकिन फिर भी कुपोषित (malnourished) हैं। यह माइक्रोन्यूट्रिएंट डेफिशिएंसी (विटामिन और मिनरल्स की कमी) की वजह से है, जिसे अंग्रेजी में hidden hunger कहते हैं।
  • आंकड़े (हैलट अस्पताल की रिपोर्ट से):
    • ओपीडी में आने वाले औसत 80% मरीजों में विटामिन, मिनरल्स (जैसे विटामिन B12, D, A, फॉलिक एसिड, कैल्शियम आदि) की कमी पाई गई।
    • मेडिसिन ओपीडी: औसत 300 मरीज/दिन।
    • अस्थि रोग (ऑर्थो) ओपीडी: औसत 200 मरीज/दिन।
    • न्यूरो ओपीडी: औसत 150 मरीज/दिन।
    • ज्यादातर मरीज 18-50 साल की उम्र के हैं।
  • मुख्य कारण:
    • जंक फूड और फास्ट फूड की लत (बाहर का खाना, कोल्ड ड्रिंक्स आदि)।
    • घर के खाने में पौष्टिकता की कमी – सलाद, हरी सब्जियां, फल नहीं खाए जाते।
    • 50% लोग सलाद को नजरअंदाज करते हैं → फाइबर और अन्य पोषक तत्वों की कमी → आंतों की समस्या।
    • संतुलित आहार का अभाव, व्यायाम न करना, धूप न लेना।
  • कमी से होने वाली समस्याएं:
    • विटामिन B12 कमी: हाथ-पैरों में झनझनाहट (tingling), न्यूरोलॉजिकल समस्या।
    • विटामिन D कमी (75-80% में): हड्डियों में कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, ऑस्टियोपोरोसिस जैसे लक्षण।
    • विटामिन A कमी: आंखों की कमजोरी, रतौंधी (night blindness)।
    • B कॉम्प्लेक्स कमी: त्वचा सूखना, बाल झड़ना।
    • मांसपेशियां कमजोर होना, नसों में दर्द, हड्डियां दर्द, थकान आदि।
    • लोग इन लक्षणों को बीमारी समझकर बेवजह दवाएं खाते रहते हैं, जबकि असली समस्या पोषण की कमी है।
  • डॉक्टर्स की राय:
    • डॉ. विशाल कुमार गुप्ता (मेडिसिन प्रोफेसर, GSVM): 80% में कमी, सप्लीमेंट्स की जरूरत।
    • डॉ. फहीम अंसारी (वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ): विटामिन D कमी से कई बीमारियां उभरती हैं, लोग गलत इलाज करते हैं।

डॉक्टर्स द्वारा सुझाए गए उपाय (इन बातों का रखें ध्यान):

  • रोजाना सलाद जरूर खाएं (कच्ची सब्जियां)।
  • रेशेदार पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, सरसों आदि) शामिल करें।
  • मौसमी फल प्रतिदिन लें (केला, संतरा, अमरूद, सेब आदि)।
  • सादा और पौष्टिक घर का खाना खाएं – दाल, रोटी, सब्जी, दूध/दही।
  • रोजाना व्यायाम या चहलकदमी करें।
  • सुबह की धूप में 15-20 मिनट बैठें (विटामिन D के लिए)।
  • जंक फूड, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन कम से कम करें।