कानपुर के ग्वालटोली थाने से जुड़ी है, जहां पुलिस को एक बार फिर कोर्ट से झटका लगा है। यह लैंबॉर्गिनी हादसे के आरोपी शिवम मिश्रा (तंबाकू कारोबारी के.के. मिश्रा के बेटे) का मामला है, जो “लुटेरी दुल्हन” केस के बाद पुलिस की दूसरी किरकिरी मानी जा रही है।
मुख्य घटना का सारांश:
- हादसा कब और कैसे हुआ: 8 फरवरी 2026 (रविवार रात) को कानपुर के VIP रोड पर तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी रेवेल्टो (कीमत ₹10-12 करोड़) ने ऑटो-रिक्शा, बाइक और अन्य वाहनों को टक्कर मारी। कार पोल से टकराई। 6 लोग घायल हुए (गंभीर नहीं), जिसमें ई-रिक्शा चालक मोहम्मद तौफीक मुख्य पीड़ित था। कार सीज कर ली गई।
- आरोप: पुलिस जांच (सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान) से दावा किया कि कार शिवम मिश्रा चला रहा था। शुरुआत में अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई।
- ड्रामा:
- शिवम के पिता के.के. मिश्रा थाने पहुंचे, कहा बेटा अस्वस्थ है और दिल्ली में इलाज करा रहा है।
- शिवम का दावा: कार में उनका चालक मोहनलाल भी था, और हादसे के समय मोहन चला रहा था।
- बुधवार (11 फरवरी) को मोहनलाल और तौफीक के बीच समझौता का दावा – तौफीक ने कहा कि क्षतिपूर्ति मिल गई, अब कार्रवाई नहीं चाहते। पुलिस ने समझौते को नकार दिया।
- गिरफ्तारी: गुरुवार (12 फरवरी 2026) सुबह पुलिस ने शिवम को गिरफ्तार किया। आधार: नोटिस पर ध्यान न देना। पुलिस ने कोर्ट में पेश किया और 14 दिन की रिमांड मांगी।
- कोर्ट का फैसला: एसीजेएम/एसीएमएम कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज कर दी। कारण:
- लगी धाराएं 7 साल से कम सजा वाली (जमानती) हैं।
- गिरफ्तारी में प्रक्रियागत खामी (procedural lapses) – BNSS नियमों और सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार केस गाइडलाइंस का पालन नहीं किया।
- पुलिस रिमांड का ठोस आधार नहीं बता सकी।
- शिवम को ₹20,000 के निजी मुचलके (personal bond) पर रिहा कर दिया गया। शर्त: जांच में पूरा सहयोग।
- पुलिस की किरकिरी:
- पहले “लुटेरी दुल्हन” मामले में पुलिस ने महिला को जेल भेजने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने सबूत न होने पर रिहा कर दिया।
- अब इस केस में भी गिरफ्तारी के बाद घंटों में रिहाई – सुबह गिरफ्तार, दोपहर तक जमानत (कुछ रिपोर्ट्स में 5-7 घंटे में)।
- कोर्ट ने पुलिस की जांच और प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
अन्य रिपोर्ट्स से अतिरिक्त डिटेल्स:
- शिवम ने खुद कोर्ट में अपना पक्ष रखा (कुछ रिपोर्ट्स में)।
- पुलिस ने 5 टीमें लगाकर छापेमारी की थी, लेकिन गिरफ्तारी 4 दिन बाद हुई।
- पीड़ित तौफीक ने समझौता किया, लेकिन पुलिस ने केस जारी रखा।
- मामला अब जांच में है, लेकिन आरोपी बाहर है।
यह मामला रसूखदारों vs पुलिस की छवि को फिर से उजागर करता है, जहां तेज कार, हादसा, गिरफ्तारी और तुरंत जमानत का सिलसिला चला। पुलिस पर प्रक्रियागत लापरवाही के आरोप लगे हैं। अगर आगे अपडेट (जैसे चार्जशीट या नई सुनवाई) आए, तो बता सकते हैं!

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