यह अध्ययन डॉ. मेघना सिंह, डॉ. अमित गोयल, डॉ. मंजू लता वर्मा, डॉ. सीमा मेहरोत्रा और डॉ. पुष्पलता संखवार ने किया है। अध्ययन में 602 गर्भवती महिलाओं में खून की जांच की गई। हेपेटाइटिस ई वायरस के आईजीजी एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए बीजिंग में निर्मित वांटाई एचईवी आईजीजी एलिसा डायग्नोस्टिक किट का उपयोग किया गया। इन महिलाओं में से 287 रोगी, यानी 47.7 फीसदी हेपेटाइटिस-ई से संक्रमित मिलीं। इनमें ज्यादातर की बीएमआई सामान्य से कम थी। बीएमआई वजन और ऊंचाई के आधार पर शरीर में वसा का अनुमान लगाने वाला एक सरल उपकरण है। इसकी गणना व्यक्ति के वजन को ऊंचाई के वर्ग से भाग करके निकाला जाता है। स्वस्थ वयस्कों के लिए आदर्श बीएमआई सीमा 18.5 से 24.9 के बीच होती है।
ग्रामीण क्षेत्र में संक्रमण का खतरा ज्यादा
अध्ययन में देखा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में यह प्रचलन शहरी आबादी की तुलना में अधिक था। ग्रामीण क्षेत्रों की कुल 51.3 फीसदी महिलाएं सीरोपॉजिटिव थीं, जबकि शहरी आबादी में यह आंकड़ा 45.3 फीसदी था।
जानें, क्या है हेपेटाइटिस-ई
हेपेटाइटिस-ई वायरल लिवर संक्रमण है, जो हेपेटाइटिस ई वायरस के कारण होता है। यह मुख्य रूप से प्रदूषित पानी और दूषित भोजन (विशेषकर अधपका मांस) के सेवन से फैलता है। पीलिया, बुखार, उल्टी और पेट में दर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं। सामान्य तौर पर यह कुछ सप्ताह में ठीक हो जाता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।