February 27, 2026

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पेटेंट-ट्रेडमार्क लेने के लिए वर्षों करना पड़ेगा इंतजार, 5000 से ज्यादा आवेदन फंसे, 25 हजार तक बढ़ा खर्च

Kanpur Patent and trademark applications may require years of waiting with over 5000 applications stuck

कानपुर शहर के एक व्यापारी ने स्वीट सुपाड़ी ट्रेडमार्क के लिए 17 फरवरी को आवेदन किया। उनके ट्रेडमार्क का परीक्षण करने के दौरान बौद्धिक संपदा विभाग भारत की ओर से बताया गया कि उनके आवेदन का परीक्षण 946 कार्यदिवस के बीच कराया जाएगा। यानी परीक्षण के लिए ही व्यापारी को ढाई साल से ज्यादा समय इंतजार करना पड़ेगा। बता दें कि अपने उत्पादों की ब्रांडिंग और उनकी अलग पहचान बनाए रखने के लिए कारोबारी उत्पाद का ट्रेडमार्क और पेटेंट कराते हैं।

लेकिन उन्हें इसे हासिल करने में दो से तीन साल लग जाएंगे। वर्तमान में कई आवेदन 600 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं, जबकि नए आवेदन 700-946 दिनों तक लंबित दिखाई दे रहे हैं। शहर में हर साल करीब पांच हजार ट्रेडमार्क और 500-1000 के बीच पेटेंट कराए जाते हैं। पेटेंट और ट्रेडमार्क आवेदनों की जांच में हो रही अत्यधिक देरी ने व्यापारियों, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अप्रैल 2024 तक आवेदनों की जांच आमतौर पर दो से तीन माह में पूरी हो जाती थी।

आवेदनों को कम करने के लिए नया अभियान शुरू
अब हो रही देर से व्यापारी, छोटे एमएसएमई और स्टार्टअप्स सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सरकार की ओर से आवेदन शुल्क में 50 फीसदी की छूट देने के बावजूद जांच में हो रही देरी के कारण इन लोगों को अपने उत्पाद लांच करने से पहले तत्काल जांच का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें 20,000 से 25,000 रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है। इससे उनके ट्रेडमार्क पंजीकरण का कुल खर्च काफी बढ़ गया है। ट्रेडमार्क और पेटेंट विशेषज्ञ नवदीप श्रीधर ने बताया कि लंबित आवेदनों को कम करने के लिए नया अभियान शुरू किया गया है।

ट्रेडमार्क और पेटेंटों को संविदा कर्मचारियों ने मंजूरी दे दी थी
भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अधीन महानियंत्रक पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेडमार्क (सीजीपीडीटीएम) कार्यालय ने 17 फरवरी 2026 को नेशनल आईपी पेंडेंसी एलिमिनेशन कर्म-मिशन (एनआईपीईकेएम) की शुरुआत की है। इस अभियान की शुरुआत जरूर की गई है लेकिन जिस दिन अभियान शुरू किया है। उसी दिन हुए आवेदन में ही एक ट्रेडमार्क के लिए 946 कार्यदिवस में निस्तारण की बात कही गई है। पूर्व में भी 600-700 दिन इस काम में बताए जा रहे थे। अब तो और दिन बढ़ गए हैं। इसलिए हो रही देरी ढाई साल पहले कानपुर समेत देशभर के छह लाख से ज्यादा ट्रेडमार्क और पेटेंटों को ऐसे संविदा कर्मचारियों ने मंजूरी दे दी थी।

आवेदनों का बोझ बढ़ता चला गया
उन्हें ऐसा करने का अधिकार ही नहीं था। क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने इन कर्मियों को सिर्फ सुनवाई और परीक्षण का ही अधिकार दिया था। इस पर कोलकाता हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने फैसले में संविदा अधिकारियों की ओर से पारित किए गए आदेशों को अशक्त और शून्य करार दिया था। इसके बाद सरकार ने 65 अफसरों की टीम बनाई थी जिन्हें ट्रेडमार्क और पेटेंट मंजूरी आदेशों की समीक्षा करने के लिए कहा गया था। सभी 600 से ज्यादा संविदा कर्मचारियों को हटा दिया गया था। बाद में नई भर्ती की गई और प्रशिक्षण दिया गया। छह लाख ट्रेडमार्क और पेटेंट की अभी भी समीक्षा की जा रही है। इसके चलते भी आवेदनों का बोझ बढ़ता चला गया।