
ब्याह के बाद पहली बार शिव जी गौना कराकर माता गौरा संग काशी नगरी आए थे। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि होली से पहले आने वाली एकादशी को रंगभरी और आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस दिन से बनारस में बाबा विश्वनाथ को होली खेलकर इस पर्व की शुरुआत की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गोना कराकर पहली बार काशी आए थे। ऐसे में मेरठ में भी होली उत्सव की शुरुआत हो जाती है। आज भगवान नारायण, शिव पार्वती की पूजा होगी। इस दिन आंवले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। इस दिन शुभ ग्रह योगों के प्रभाव से व्रत और पूजा का पुण्य और बढ़ जाएगा।
ज्योतिषाचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि रंगभरी एकादशी पूजन 27 फरवरी को 6 बजकर 48 मिनट से आरंभ होगा। भक्त इस समय में भगवान विष्णु, शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगे। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 5 बजकर 9 मिनट से 5 बजकर 58 मिनट तक विशेष पूजा। जो लोग सुबह जल्दी उठकर जप-तप और पूजा करते हैं उनके लिए यह समय बहुत शुभ है।
रंगभरी एकादशी पर करियर संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए आंवले के पेड़ पर जल चढ़ाएं। आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि इसके बाद जड़ से मिट्टी लेकर उसका तिलक अपने माथे पर लगाएं। इस एक उपाय से आपकी जिंदगी में आने वाली वो सारी बाधाएं खत्म हो जाएंगी। जिसकी वजह से आप करियर में वृद्धि नहीं देख पा रहे हैं।
