सांसद चंद्रशेखर पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ दोपहर 12 बजे के बाद किदवई नगर के कारोबारी इकबाल के घर पहुंचे। इकबाल अहमद को उन्होंने गले लगाकर सांत्वना दी। उनके बेटे से भी वह मिले। आजाद ने कहा कि आग्निकांड में जान गंवाने वाले छह माह से लेकर चार साल के मासूमों तक की तस्वीरें देखकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्होंने राजस्थान की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वहां एक बच्चे को चोट लगी थी। उस बच्चे की जगह मैंने अपने बच्चों को रख कर देखा तो एहसास हुआ कि पिता का दर्द क्या होगा। यहां तो एक साथ छह जानें चली गई हैं। उन्होंने कहा कि इस परिवार के दुख को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्हें जानकारी मिली कि इस परिवार ने इतना बड़ा नुकसान होने के बावजूद किसी भी तरह की मदद लेने से साफ निकल कर दिया। प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह खुद आगे आकर आर्थिक रूप से टूट चुके इस परिवार की मदद करे। कम से कम पांच करोड़ रुपये का मुआवजा इस परिवार को दे। सांद ने कहा कि वह खुद सरकार से इसकी मांग करेंगे। परिजनों ने बताया कि इस हादसे के हफ्ते भर बाद भी वह बेघर हैं। हादसे वाले दिन अफसरों ने जांच कमेटी बनाकर भेजने की बात कही थी। यह कहा था कि तब तक कोई भी घर में प्रवेश नहीं करेगा। लेकिन, अभी कोई कमेटी नहीं आई है। प्रशासन इस परिवार का दुख समझे और जांच पूरी कर जल्द से जल्द घर परिवार को सौंप दे।
23 फरवरी की शाम किदवई नगर में रहने वाले इकबाल अहमद के घर में अचानक आग लग गई थी, जिसमें उनकी एक पुत्रवधू रुखसार के अलावा पांच बच्चों की दम घुटने से मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद से ही किदवई नगर में सांत्वना देने वालों का तांता लगा है। सपा और आप के नेता मिलकर जा चुके समाजवादी पार्टी के विधायक शाहिद मंजूर, रालोद विधायक गुलाम मोहम्मद के अलावा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी परिवार से मिलकर सांत्वना दे चुके हैं। उन्होंने भी हादसे पर दुख जताया था और पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया था।
इस दौरान उन्होंने अमेरिका-इजरायल को लेकर कहा कि दोनों में सुपर पावर बनने की होड़ मची है। कभी किसी देश के राष्ट्रपति को उठा लाते हैं तो कभी किसी देश को धमकाते हैं। ईरान इनकी धमकियों के आगे झुका नहीं, इसलिए यह हमला किया गया है। कहा कि तानाशाह देश गलतफहमी न पालें। कहा कि अमेरिका तानाशाही पर आमादा है। उसने हमारे देश के प्रधानमंत्री को भी धमकी दी थी कि कॅरिअर खत्म कर देंगे और टैरिफ लेकर रहेंगे। ट्रंप यह समझ ले कि यह भारत है। बात अगर देश की मिट्टी पर आई तो यहां का एक-एक नौजवान मुंह तोड़ जवाब देने पर लिए खड़ा हो जाएगा। यहां के युवा के लिए देश से बड़ा कुछ भी नहीं है। फिलिस्तीन, ईरान पर हमला कर वह यह न समझ ले कि भारत दब जाएगा।