
समिति गठन की बात पर अदालत ने टिप्पणी की कि इसका सीधा अर्थ है कि दो महीने तक जमीन का अवार्ड (मुआवजा निर्धारण) घोषित नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि निर्माण में देरी के बावजूद विस्थापन के आकलन की प्रक्रिया अब इस स्तर पर शुरू की जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह विस्थापन के प्रभाव और अन्य संबंधित मुद्दों का गहन परीक्षण करेगी
इससे पहले सेतु निगम के अधिवक्ता ने कोर्ट को सूचित किया कि मुआवजे के लिए निगम की ओर से 27 करोड़ रुपये सरकारी कोष में पहले ही जमा कराए जा चुके हैं। जनहित याचिका में तर्क दिया गया है कि क्षेत्र की बड़ी आबादी को जाम से निजात दिलाने के लिए इस ओवरब्रिज का निर्माण जल्द पूरा होना अनिवार्य है।