लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह के मुताबिक, ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के 70-80 फीसदी मरीज मोटापे से ग्रस्त होते हैं और 90 फीसदी मोटे व्यक्तियों में यह बीमारी हो सकती है। जागरूकता की कमी से निदान नहीं हो पाता। निदेशक शनिवार को संस्थान में आयोजित सीएमई में बोल रहे थे।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत ने जोर से खर्राटे, दिन में ज्यादा नींद और सांस रुकने को गंभीरता से लेने को कहा। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और उपचार से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अजय कुमार वर्मा ने अच्छी नींद को समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। कार्यशाला में स्लीप एपनिया के निदान, उपचार, पीएपी थेरेपी और डेंटल उपकरणों की भूमिका पर चर्चा हुई। बच्चों में खर्राटों को नजरअंदाज न करने की सलाह भी दी गई। इस मौके पर डॉ. विभा गंगवार, डॉ. अनिल कुमार सिंह, हेमंत कुमार, डॉ. आशीष झा मौजूद रहे।
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