
पहले सत्र का संचालन विशेषज्ञ वरिष्ठ पत्रकार नितिन गोखले ने किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहली महिला स्थायी प्रतिनिधि रहीं राजदूत रुचिरा कंबोज, राजदूत यशवर्धन सिन्हा व लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने सत्र को संबोधित किया। राजदूत दिलीप सिन्हा, डॉ. शांतनु मुखर्जी, शरत चंदर, लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने भी विचार व्यक्त किए। वहीं, चीफ ऑफ स्टाफ एचक्यूसीसी लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा ने विभिन्न सत्रों में हुई चर्चाओं का सारांश पेश किया।
कम्युनिकेशन एक्सपर्ट नितिन गोखले ने कहा कि संकट आने से पहले ही संदेश और थीम तैयार होनी चाहिए। न कि संकट के समय। यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए, चाहे शांति हो या तनाव। हम लोग अभी संकट आने पर ही जागते हैं और ‘क्राइसिस कम्युनिकेशन’ करते हैं, जबकि ‘स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन’ पर फोकस करना चाहिए। लेखक और कंटेंट राइटर्स को बढ़ावा देना चाहिए। जैसे पेंटागन ने हॉलीवुड में अफसर भेजे हैं, जो अमेरिकी सेना की तारीफ वाली फिल्में बनवाते हैं- ब्लैक हॉक डाउन, आर्गो, टॉप गन सरीखी। अब ओटीटी प्लेटफॉर्म बढ़ गए हैं। क्या हमारी सेना या सरकार की असली कहानियों पर फिल्में, डॉक्यूमेंट्री बन रही हैं, यह सोचना होगा।
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान दो दिनों तक जवाब देने की हालत में नहीं था। इसके बाद अचानक एआई से बने फर्जी वीडियो वायरल होने लगे। कहीं महिला पायलट पाकिस्तान की गिरफ्त में तो कहीं एस-400 डिफेंस सिस्टम के तहस-नहस होने के वीडियो आए। लेकिन जब पीएम आदमपुर वायुसेना स्टेशन गए और पीछे एस-400 नजर आया तो पाकिस्तानी झूठ की पोल खुली। रक्षा विशेषज्ञ मनीष प्रसाद ने डिजिटल रणक्षेत्र पर भ्रामक सूचनाएं फैलाने और उस पर कड़ा प्रहार करने की उपयोगिता पर कुछ ऐसे ही रोशनी डाली। उन्होंने सेनाओं को भी इस क्षेत्र में अधिक सतर्क रहने का सुझाव दिया।

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