
कई जगहों पर मिलावटी मावा और खराब तेल से बने पकवान भी खाए गए। इसके कारण लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं होने लगीं। शुक्रवार को भी इस समस्या से पीड़ित लगभग 150 मरीज पहुंचे थे। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. बीके सुमन ने बताया कि डायरिया और उल्टी-दस्त से पीड़ित कुछ मरीज भी उपचार के लिए आए थे।
नेत्र रोग विभाग में भी बढ़े मरीज
एम्स के नेत्र रोग विभाग में भी कई मरीज पहुंचे। दरअसल, होली में कई लोग केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल करते हैं, जो आंखों के लिए नुकसानदायक साबित होने लगता है। शनिवार को एम्स में लगभग 90 मरीज पहुंचे, जिनमें से 40 से 50 मरीज ऐसे थे जिन्हें आंखों में रंग जाने, जलन, खुजली और लालिमा की शिकायत थी। डॉक्टर ने सलाह देने के साथ ही दवाई भी दी। डॉक्टरों ने सुझाव दिया कि आंख में कुछ चला जाए तो उसे मसलना नहीं चाहिए बल्कि साफ पानी से आंखों को धोना चाहिए।
बेतियाहाता के 39 वर्षीय विनय अग्रवाल ने बताया कि होली पर घर पर ही सारे पकवान बने थे लेकिन सामान सही जगह से नहीं लिया। सस्ते के चक्कर में मिलावटी तेल लेते आया। होली के दिन घर में बने पकवानों के कारण सबका हाजमा खराब हो गया। पास के डॉक्टर को दिखाकर सभी को दवा दी। सबकी स्थिति ठीक हो गई। पिताजी पहले से गैस्ट्रो के मरीज हैं। इनकी हालत ज्यादा खराब होने पर अस्पताल लाना पड़ा।
बक्शीपुर के मंशू ने बताया कि होली में ठंडाई पीने के बाद गुझिया खा लिया था। बाजार की खरीदी हुई मिलावटी गुझिया खाने से तबीयत बिगड़ गई। दो दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। त्योहारों में बाहर की कोई भी चीज बाहर की खाने से तबीयत बिगड़ जाती है।

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