May 19, 2024

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पत्नी और दो बच्चों को मार डाला, बोरे में भरकर रख दिए शव, बदबू आने पर मालिक ने खिड़की से देखा

लखनऊ शहर के बिजनौर के सरवन नगर इलाके में एक पीओपी कारीगर ने अपनी पत्नी और दो बच्चों की हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद वह उसी कमरे में रहता रहा। रविवार को मकान मालिक जब वहां पहुंचे तो बदबू आने पर खिड़की से कमरे में देखा। जहां महिला और बच्चों का शव पड़ा दिखा। तब उन्होंने पुलिस को सूचना दी। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मूलरूप से बलरामपुर के रतनपुर निवासी रामलगन गौतम बिजनौर के गौरी इलाके में किराये पर रहता था। 15 मार्च को उसने सरवन नगर में कमरा किराये पर लिया और पत्नी ज्योति (30), बेटी पायल (6) व बेटे आनंद (3) के साथ रह रहा था। रविवार दोपहर इलाके में ही रहने वाले मकान मालिक धीरेंद्र कुमार वहां पहुंचे। मकान से बहुत बदबू आ रही थी। वह तुरंत पहली मंजिल पर स्थित रामलगन के कमरे के बाहर गए। खिड़की से भीतर देखा तो जमीन पर ज्योति का शव दिखा। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस कमरे का ताला तोड़कर भीतर दाखिल हुई तो महिला के अलावा अलग-अलग बोरों में दो बच्चों के शव मिले। मकान मालिक की तहरीर पर रामलगन के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज की गई है।

अवैध संबंधों के शक में की हत्या

डीसीपी साउथ तेज स्वरूप सिंह के मुताबिक आरोपी ने बताया कि वह करीब डेढ़ दशक पहले मुंबई में काम करता था। 2014 में वहीं पर उसने ज्योति से प्रेम विवाह कर लिया था। आरोपी के मुताबिक उसको शक था कि पत्नी का किसी दूसरे शख्स से संबंध है। वह उससे फोन पर बात करती थी। इसको लेकर पहले भी विवाद हुआ था। तब वह उस युवक के साथ कमता इलाके में रहने लगी थी। कुछ महीने के बाद रामलगन के पास लौट आई थी। इन्हीं बातों की वजह से उसने ज्योति की हत्या की फिर बच्चों को भी मार डाला।

मां को बचाने के लिए गिड़गिड़ाते रहे थे बच्चे

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने 28 मार्च की रात ही घटना को अंजाम दिया। सोते वक्त जैसे ही पत्नी का गला कसा वैसे वह चीख पड़ी, जिससे दोनों बच्चे जाग गए। वह पिता का पैर पकड़ कर मां को बचाने के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन रामलगन को तरस नहीं आया। बच्चों की आंखों के सामने ही पत्नी को मार दिया। बाद में उसको लगा कि बच्चे किसी से कुछ कह न दें इसलिए एक-एक कर उनको भी मौत के घाट उतार दिया।

 

बदबू से बचने को जलाता था नीम की पत्तियां

पत्नी और दो मासूम बच्चों की हत्या करने वाला रामलगन बेखौफ था। न तो उसको अपनों की हत्या करने का जरा भी अफसोस था न ही किसी तरह का डर। वारदात को अंजाम देने के बाद वह उसी कमरे में सोता था, जहां तीनों लाशें पड़ी थीं। उसी कमरे में खाना बनाकर खाता था, सुबह कमरा बंद कर काम पर चला जाता था। बदबू न आए इसलिए नीम की पत्तियां जलाता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में बताया कि हत्या करने के बाद वह समझ नहीं पा रहा था कि शकों को कैसे और कहां ठिकाने लगाए। इसलिए वहीं पर लाशें पड़ी रहीं। चूंकि उसकी पत्नी ज्योति के परिजनों के संपर्क में न तो वह था न ही ज्योति, इसलिए वह और भी ज्यादा बेफिक्र था।

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