January 12, 2026

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कानपुर का तिलकनगर पूरा कर रहा 100 साल: स्वतंत्रता संग्राम की गवाह बनी यह बस्ती

कानपुर, 24 दिसंबर 2025:

कानपुर शहर के सबसे पॉश और प्रतिष्ठित इलाकों में शुमार तिलकनगर ने अपने 100 साल पूरे कर लिए हैं। यह इलाका न केवल आधुनिक बंगलों, चौड़ी सड़कों और हाई-राइज अपार्टमेंट्स के लिए जाना जाता है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक महत्वपूर्ण अध्याय का साक्षी भी रहा है। 1925 में यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 40वें अधिवेशन का आयोजन हुआ था, जिसने इस जगह को ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया।

1925 में ग्वालटोली और नवाबगंज के बीच स्थित म्यूनिसिपल मैदान को कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन के लिए चुना गया था। अधिवेशन 23 से 29 दिसंबर तक चला। अस्थायी पंडालों के निर्माण का शिलान्यास 25 अक्टूबर 1925 को पंडित मोतीलाल नेहरू ने किया था। उन्होंने ही लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के सम्मान में इस अस्थायी बस्ती का नाम ‘तिलकनगर’ रखा। उस समय यह जगह कृषि भूमि थी, जो बाद में शहर के विकास के साथ पॉश रिहायशी क्षेत्र में तब्दील हो गई।

अधिवेशन में महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए। मुख्य एजेंडा स्वराज और राष्ट्रीय एकता था। 24 दिसंबर को स्वदेशी प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए गांधीजी ने विदेशी कपड़ों के बहिष्कार की अपील की और कहा कि खद्दर अपनाने से एक साल में स्वराज हासिल हो सकता है।

इस अधिवेशन की एक और बड़ी उपलब्धि थी सरोजनी नायडू का कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना। वह पहली भारतीय महिला थीं, जिन्हें यह जिम्मेदारी मिली। इससे पहले 1917 में एनी बेसेंट विदेशी महिला के रूप में अध्यक्ष बनी थीं।

कानपुर इतिहास समिति के महासचिव अनूप कुमार शुक्ल और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शंकर दत्त मिश्रा के अनुसार, लोकमान्य तिलक की 1920 में मृत्यु के बाद गांधीजी ने उनके सम्मान में देशभर में स्थलों का नामकरण कराने की पहल की थी। 1950-60 के दशक में कानपुर में औद्योगिक विकास के साथ इस क्षेत्र में आवासीय कॉलोनियां बसीं। कानपुर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने इसे योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया। आज यहां मॉल, होटल, नामी कंपनियों के शोरूम और हस्तियां रहती हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस अधिवेशन से जन्मी इस बस्ती से पार्टी का कोई बड़ा नेता, विधायक या सांसद नहीं निकल सका। फिर भी तिलकनगर स्वतंत्रता संग्राम की यादों को संजोए हुए है और शहर के विकास का प्रतीक बना हुआ है।

(स्रोत: आर्काइव और ऐतिहासिक दस्तावेज)