कानपुर के काकादेव नवीननगर निवासी जयप्रकाश वर्मा (75) की दर्दनाक मौत की खबर ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। 16 दिसंबर को यमुना एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे के कारण हुए भीषण सड़क हादसे में शताब्दी स्लीपर बस में सवार जयप्रकाश जिंदा जल गए। रविवार शाम उनके शव के अवशेष डीएनए जांच के बाद घर पहुंचे तो परिवार में कोहराम मच गया। नम आंखों से अंतिम संस्कार भैरव घाट पर किया गया।
परिवार के अनुसार, हादसे के तुरंत बाद जयप्रकाश ने अपनी बेटी मनीषा को फोन किया था। सुबह करीब 4:25 बजे आए इस आखिरी कॉल में उन्होंने कहा, “बस का एक्सीडेंट हो गया है, मैं अंदर बुरी तरह फंस गया हूं… बचा लो…”। इसके बाद कॉल अचानक कट गई। परिवार में हड़कंप मच गया। मनीषा तुरंत मथुरा पहुंचीं, जहां उन्होंने अस्पतालों में घायलों की लिस्ट चेक की और जिला मजिस्ट्रेट से संपर्क किया, लेकिन पिता का नाम कहीं नहीं मिला।
पुलिस ने बाद में बताया कि टक्कर के बाद बस में आग लग गई और कई यात्री जिंदा जल गए। जयप्रकाश भी उनमें शामिल थे। आग इतनी भयानक थी कि शवों की पहचान मुश्किल हो गई। अवशेषों को डीएनए टेस्ट के लिए भेजा गया। पुष्टि के बाद रविवार को अवशेष घर लाए गए।
जयप्रकाश एक पेंट कंपनी में काम करते थे और काम के सिलसिले में शताब्दी बस से मथुरा जा रहे थे। उनके परिवार में एक बेटा और चार बेटियां हैं। घर के बाहर भीड़ जुटी रही और हर किसी की आंखें नम थीं।
बता दें कि 16 दिसंबर को मथुरा के यमुना एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे में 8 बसें और 3 कारें आपस में टकराई थीं। हादसे में कई वाहन आग की लपेट में आ गए, जिसमें 13 से अधिक लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए। कई शव इतने जल चुके थे कि डीएनए से ही पहचान संभव हुई।

More Stories
गोरखपुर में रिटायर्ड लेखपाल के घर डकैती का मामला: दो कुख्यात बदमाश गिरफ्तार, मुठभेड़ में घायल
गोरखपुर: वाणिज्य कर कार्यालय भवन में भीषण आग, वर्षों पुराने रिकॉर्ड जलकर राख –
वाराणसी में सिंथेटिक मांझा/नायलॉन धागे पर सख्ती: डीएम, सीपी और यूपीपीसीबी को कानूनी नोटिस