January 12, 2026

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आईआईटी कानपुर में फिर सुसाइड: प्लेसमेंट और बैक पेपर के दबाव में बीटेक छात्र जयसिंह ने की आत्महत्या, 22 महीनों में सातवीं घटना

आईआईटी कानपुर में एक बार फिर छात्र आत्महत्या की दुखद घटना ने संस्थान को झकझोर कर रख दिया है। बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र जयसिंह ने कथित तौर पर प्लेसमेंट न मिलने और बैक पेपर क्लियर न होने के तनाव में अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना संस्थान में बढ़ते मानसिक दबाव और काउंसलिंग व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पिछले 22 महीनों में यह सातवीं आत्महत्या की घटना है।

सूत्रों के अनुसार, बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के छात्र जयसिंह (2020 बैच) का चार साल का कोर्स 2024 में पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन कुछ विषयों में कमजोर प्रदर्शन के कारण बैक पेपर क्लियर नहीं हो सका। इससे उन्हें दो बार प्लेसमेंट में शामिल होने का मौका नहीं मिला और ईयर बैक की आशंका बनी हुई थी। हताशा में उन्होंने यह कदम उठा लिया। संस्थान प्रशासन ने छात्र की एकेडमिक रिपोर्ट तलब की है और पुलिस जांच कर रही है। वर्ष 2025 में यह चौथी ऐसी मौत है।

पिछले 22 महीनों में हुई प्रमुख आत्महत्याएं

  • 19 दिसंबर 2023: शोध सहायक डॉ. पल्लवी चिल्का
  • 10 जनवरी 2024: एमटेक छात्र विकास मीणा
  • 18 जनवरी 2024: पीएचडी छात्रा प्रियंका जायसवाल
  • 10 अक्टूबर 2024: पीएचडी छात्रा प्रगति
  • 10 फरवरी 2025: पीएचडी स्कॉलर अंकित यादव
  • 25 अगस्त 2025: सॉफ्टवेयर डेवलपर दीपक चौधरी
  • 01 अक्टूबर 2025: बीटेक छात्र धीरज सैनी

इन घटनाओं ने संस्थान की काउंसलिंग व्यवस्था पर उंगली उठाई है। डीन ऑफ एकेडमिक्स प्रो. अशोक डे ने कहा कि निदेशक के मेल से घटना की जानकारी मिली है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

प्रशासन का दावा: मजबूत है मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था आईआईटी प्रशासन का कहना है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यापक इंतजाम हैं। संस्थान में 9 प्रोफेशनल काउंसलर (मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक) 24 घंटे उपलब्ध हैं। मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (सीएमएचडब्ल्यू) को मजबूत किया गया है, जिसमें 10 पूर्णकालिक मनोवैज्ञानिक और एक क्लिनिकल हेड हैं। 24 घंटे हेल्पलाइन, डी-एडिक्शन क्लीनिक, पीयर मेंटरिंग, नए छात्रों की मानसिक जांच और जागरूकता कार्यशालाएं नियमित आयोजित की जाती हैं। हर 30 छात्रों पर एक फैकल्टी एडवाइजर भी तैनात है।

फिर भी लगातार घटनाएं सवाल उठा रही हैं कि क्या ये सुविधाएं जरूरतमंद छात्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंच पा रही हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि अकादमिक दबाव, प्लेसमेंट की चिंता और प्रतिस्पर्धा के माहौल में छात्रों को अधिक संवेदनशील सहायता की जरूरत है। संस्थान ने घटना पर गहरा दुख जताया है और जांच जारी है।